फर्जी दस्तावेजों से पेशेवर अपराधियों की जमानत कराने वाले गिरोह का राजफाश, छह गिरफ्तार

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 कचहरी में वर्षों से चुपचाप फल-फूल रहा पेशेवर अपराधियों की जमानत कराने वाले गिरोह का पुलिस ने राजफाश कर लिया है। शहर कोतवाली, स्वाट और सर्विलांस की संयुक्त कार्रवाई में ऐसे छह जमानतदारों को गिरफ्तार किया गया है, जो फर्जी दस्तावेजों के सहारे गंभीर अपराधों में निरुद्ध अपराधियों को जेल से बाहर निकालने का संगठित खेल चला रहे थे। कचहरी में प्रार्थना पत्र लिखना इस पूरे नेटवर्क का सिर्फ मुखौटा था। पुलिस को सूचना मिली थी कि गंभीर आपराधिक मामलों में जेल में बंद अपराधियों को फर्जी आधार कार्ड, भू-राजस्व अभिलेख और इंतखाब जैसे दस्तावेज तैयार कर जमानत दिलाई जा रही है।

जमानतों के सत्यापन में पुलिस को कुछ जमानतदार मिले ही नहीं। मंगलवार को की गई कार्रवाई में पुलिस ने छह जमानतदारों को गिरफ्तार किया। इनमें शहर कोतवाली क्षेत्र के आवास विकास निवासी विश्वनाथ पांडेय, देहात कोतवाली के ग्राम पिपरी पोखरी निवासी धर्मेंद्र, बेहटागोकुल थाना क्षेत्र के ग्राम मवैया निवासी प्रवीण दीक्षित, शहर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम सैय्यापुरवा निवासी अमित, सांडी थाना क्षेत्र के ग्राम आदमपुर निवासी रामकिशोर और शहर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम धियर महोलिया निवासी पिंकू उर्फ प्रेमशंकर शामिल हैं।

एएसपी पूर्वी सुबोध गौतम ने बताया कि जांच में सामने आया है कि विश्वनाथ पांडेय ने फर्जी इंतखाब के जरिए दो अपराधियों की जमानत कराई थी। प्रवीण दीक्षित ने भी दो मामलों में जमानत दिलाई, जबकि रामकिशोर ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे 13 अपराधियों को जेल से रिहा कराया। अमित ने फर्जी राजस्व दस्तावेज और आधार कार्ड लगाकर तीन अपराधियों की जमानत कराई, धर्मेंद्र ने दो और पिंकू ने एक मामले में जमानत कराई थी।

पुलिस के अनुसार पिंकू कचहरी में प्रार्थना पत्र लिखने का काम करता था और वही पेशेवर अपराधियों के लिए जमानतदारों की व्यवस्था करता था। अपराध की गंभीरता के अनुसार आरोपी और उनके परिजनों से एक हजार से लेकर 20 हजार रुपये या उससे अधिक की रकम वसूली जाती थी। फिलहाल सभी आरोपितों को जेल भेज दिया गया है और अब तक कराई गई जमानतों की गहन जांच की जा रही है।

…ऐसे तो न जाने कितने अपराधियों की कराई होगी जमानत

 

फर्जी कागजों से जमानत कराने वाले गिरोह ने न जाने ऐसे कितने अपराधियों की जमानत करा दी होगी, जोकि अब लापता हैैं। जमानतदार तो इसलिए लगाए जाते हैं कि जेल से छूटने वाले आरोपित के गायब हो जाने या पर अदालत में पेशी पर हाजिर न होने की स्थिति में पुलिस जमानत दार को तलाश करती है और उसी के आधार पर पुलिस आरोपित तक पहुंचती हैै, लेकिन जब अपराधियों के पेशी पर हाजिर न होने पर जब जमानतदारों की पुलिस ने तलाश की तो गिरोह का राजफाश हो गया। जानकारों का कहना है कि इस गिरोह ने न जाने कितने अपराधियों की जमानत कराई होगी, जोकि अब लापता हो गए हैं।

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