सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अजमेर शरीफ दरगाह पर पारंपरिक रूप से भेजी जाने वाली औपचारिक ‘चादर’ चढ़ाने की प्रक्रिया पर रोक लगाने के निर्देश देने की मांग की गई थी। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि यह मामला न्यायिक हस्तक्षेप के दायरे में नहीं आता और इसे न्याय योग्य मुद्दा नहीं माना जा सकता।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। याचिका में केंद्र सरकार और उसकी विभिन्न एजेंसियों द्वारा इस्लामिक सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती और अजमेर शरीफ दरगाह को दिए जाने वाले राज्य प्रायोजित औपचारिक सम्मान और प्रतीकात्मक मान्यता को चुनौती दी गई थी।
पीठ ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान ही यह स्पष्ट कर दिया कि इस तरह के धार्मिक और परंपरागत मामलों में अदालत को दखल नहीं देना चाहिए। इसके साथ ही अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए मामले को समाप्त कर दिया।

