जम्मू में कोहरा बन रहा दिल का दुश्मन, क्या सर्दियों में होता है हार्ट अटैक का खतरा डबल?

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 जीएमसी जम्मू के हृदय रोग विभाग के एचओडी डा. सुशील शर्मा ने कहा कि जम्मू क्षेत्र में सर्दियों के मौसम में खास तरह का कोहरा और लगातार बढ़ती धुंध सिर्फ़ देखने में परेशानी पैदा करने वाली चीज नहीं है बल्कि यह दिल की बीमारियों की इमरजेंसी के लिए खामोश और खतरनाक वजह बन गए हैं।

सुचेतगढ़ ब्लाक की पंचायत बियासपुर परलाह में रविवार को आयोजित चिकित्सा शिविर में डा. सुशील ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण विभाग द्वारा जारी एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआइ) पर ध्यान दें।

जब एक्यूआइ वैल्यू 0 से 50 के बीच होती है तो हवा की क्वालिटी बहुत अच्छी होती है। हर कोई बाहर की गतिविधियों में हिस्सा ले सकता है और ताज़ी हवा का आनंद ले सकता है।

जब वैल्यू 51 से 100 के बीच होती है तो भी हवा की क्वालिटी अच्छी होती है। ज़्यादातर लोग रोज़ाना बाहरी की गतिविधि कर सकते हैं, लेकिन जब वैल्यू 101 से 150 के बीच होती है तो हल्का वायु प्रदूषण होता है।

संवेदनशील लोगों को बाहर शारीरिक गतिविधियां कम करने की ज़रूरत होती है। जब वैल्यू 151 से 200 के बीच होती है तो मध्यम वायु प्रदूषण होता है। संवेदनशील लोगों को बाहर की गतिविधियां कम से कम करनी चाहिए, जबकि आम लोगों को भी जितना हो सके कम करनी चाहिए।

जब वैल्यू 201 से 300 के बीच होती है तो गंभीर वायु प्रदूषण होता है। संवेदनशील लोगों को बाहर कोई भी गतिविधि नहीं करनी चाहिए, जबकि आम लोगों को कम से कम करनी चाहिए।

जब वैल्यू 300 होती है तो बहुत गंभीर वायु प्रदूषण होता है। खास काम करने वालों को छोड़कर सभी लोगों को घर के अंदर रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कोहरा और धुंध सिर्फ़ एक मौसम की घटना नहीं है। इसका दिल की सेहत पर गहरा असर पड़ता है।

प्रदूषकों को फंसाकर, ऑक्सीजन की उपलब्धता कम करके और ठंड से होने वाले शारीरिक तनाव को बढ़ाकर कोहरा एनजाइना, एरिथमिया, हार्ट फेलियर के बिगड़ने और अचानक दिल की बीमारियों का खतरा काफी बढ़ा देता है।

विशेषकर पहले से ही कमज़ोर दिल के मरीज़ों में अधिक आशंका रहती है। कोहरे और धुंध को एक साइलेंट कार्डियक ट्रिगर के रूप में पहचानना डाक्टरों, पालिसी बनाने वालों और समुदायों सभी के लिए ज़रूरी है।

कोहरे वाले सर्दियों के मौसम में बचाव के लिए जीवनशैली के उपाय अपनाना, दिल की बीमारियों के जोखिम वाले कारणों पर सख्त नियंत्रण सुनिश्चित करना और लोगों में जागरूकता बढ़ाना, दिल की बीमारियों से होने वाली मौतों और बीमारियों को काफी हद तक कम कर सकता है।

धुंध शांत लग सकती है लेकिन दिल पर इसका छिपा हुआ बोझ हमें याद दिलाता है कि सतर्कता, तैयारी और सक्रिय देखभाल ही इसके अनदेखे खतरों से बचने की असली ढाल हैं।

उन्होंने वायु प्रदूषण को रोकने और कोहरे और धुंध की घटना को कम करने के लिए जीवनशैली में बदलाव, पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा संरक्षण, नई और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग की ज़रूरत है जो निश्चित रूप से मानव स्वास्थ्य और विकास के लिए फायदेमंद होगा।

इलाके के प्रमुख सदस्यों चमन कुंडल, राजीव कुमार, दर्शन कुंडल और मनीष कुंडल ने डा. सुशील और उनकी टीम के अपने इलाके में शिविर आयोजित करने के प्रयासों की सराहना की।

शिविर में डॉ. वेंकटेश येलुपु और डा. आदित्य शर्मा ने भी अपनी सेवाएं दी। पैरामेडिक्स और स्वयंसेवकों में राजकुमार, राजिंदर सिंह, राहुल वैद्य, शुभम शर्मा, मुकेश कुमार, मोहम्मद अल्ताफ, विकास कुमार, गौरव शर्मा, मनमीत कुमार, जतिन भसीन, गोकुल शर्मा और निरवैर सिंह बाली शामिल रहे।

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