क्या तेजस्वी यादव ने बिहार विधानसभा की वर्षों पुरानी परंपरा तोड़ दी है? राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान तीन दिसंबर को नेता प्रतिपक्ष के रूप में उनकी अनुपस्थिति पर यह चर्चा हो रही है।
18वीं विधानसभा के पहले सत्र के तीसरे दिन तेजस्वी यादव नहीं पहुंचे। NDA ने इसे मर्यादा का उल्लंघन बताया है। कहा है कि उन्होंने नेता प्रतिपक्ष के रूप में अपने दायित्व की अनदेखी की।
दरअसल राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान नेता प्रतिपक्ष की उपस्थिति एक सम्मान का प्रतीक मानी जाती है। लेकिन शपथ ग्रहण और अध्यक्ष के चुनाव के बाद से वे अनुपस्थित चल रहे हैं।
20 दिनों के टूर पर गए तेजस्वी
बताया जा रहा है कि वे पत्नी और बच्चों के साथ छुट्टियां मनाने यूरोप टूर पर गए हैं। उन्होंने 20 दिनों का टूर प्लान बनाया है। दरअसल बिहार विधानसभा के सत्र से तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी हुई है।
चौथे दिन भी वे गैरहाजिर रहे। शुरुआत के दो दिन वे मौजूद रहे । राज्य सरकार के कई मंत्रियों ने तेजस्वी यादव पर तंज कसा है। अशोक चौधरी, संतोष कुमार सुमन, श्रवण कुमार समेत कई मंत्रियों, विधायकों ने उनकी अनुपस्थिति की निंदा की है।
JDU सांसद रामप्रीत मंडल ने कहा कि वे बिहार की जनता के बारे में संवेदनशील नहीं हैं। वे दिल्ली में भ्रमण कर रहे हैं। उन्हें जनता से कोई मतलब नहीं है। चिराग पासवान की LJP-R के विधानमंडल दल के नेता राजू तिवारी ने कहा कि वे गंभीर नहीं हैं। हमेशा गायब ही रहते हैं।
राजू तिवारी ने कहा-राज्यपाल का अभिभाषण का दिन बेहद अहम होता है। सरकार की नीतियों की चर्चा होती है। इन सबके बीच नेता प्रतिपक्ष का नहीं होना, खेदजनक है।
RJD के सिपाही सरकार को जवाब देने के लिए काफी
इधर राजद नेता रणविजय साहू ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष जरूरी काम से भले बाहर हैं, लेकिन उनके एक-एक सिपाही सदन में है और सरकार को जवाब देने के लिए काफी हैं।
राजद प्रवक्ता एजाज अहमद ने तो यहां तक कहा कि जदयू और एनडीए के दूसरे दलों की सोच पर तेजस्वी यादव छाए हुए हैं। बेहतर यही होगा कि तेजस्वी को खोजने के बजाए वे जनता को बुलडोजर नीति से बचाएं।

