आठ साल बाद भारत आए NRI को लगा शॉक, बोले- यहां की रफ्तार और किफायती लाइफस्टाइल देखकर दंग हूं

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न्यूयॉर्क से भारत आए एक NRI ने देश की तेज तरक्की और कम खर्चीली जिंदगी देखकर हैरानी जताई है। वीकेंड इन्वेस्टिंग के फाउंडर अलोक जैन ने सोशल मीडिया पर अपने इस दोस्त का अनुभव साझा किया, जो आठ साल बाद भारत लौटा था।

दोस्त ने कहा कि भारत में हर तरफ गजब की ऊर्जा है और देश बदलाव की रफ्तार से भरपूर है। इस पोस्ट ने सोशल मीडिया पर खूब चर्चा छेड़ दी है।

अलोक जैन ने लिखा कि उनका दोस्त भारत की बदलती सूरत देखकर लगातार तारीफ कर रहा था। रोजाना यहां रहने वालों को ये बदलाव धीरे-धीरे नजर आते हैं, लेकिन बाहर से आए व्यक्ति को सब कुछ एक झटके में अलग और बेहतर लगता है। खासकर मेडिकल सुविधाएं, ट्रांसपोर्ट, इंटरनेट और मोबाइल के दाम देखकर वो चौंक गया।

अमेरिका के मुकाबले भारत कितना सस्ता!

दोस्त ने कुछ कीमतों की सीधी तुलना बताई जो किसी को भी सोचने पर मजबूर कर दे। न्यूयॉर्क में घर का मोबाइल और इंटरनेट बिल हर महीने 600 डॉलर तक आता है। चार सदस्यों वाले परिवार का हेल्थ इंश्योरेंस सालाना 30 हजार डॉलर का पड़ता है। प्रॉपर्टी टैक्स हर साल संपत्ति की वैल्यू का 2 प्रतिशत देना होता है।

हालांकि वो मानता है कि अमेरिका में हवा ज्यादा साफ है, लेकिन भारत में जीवन की कई बुनियादी सुविधाएं सस्ती और पहुंच में हैं। अलोक जैन की इस पोस्ट से बाहर की नजर से भारत की तरक्की साफ झलक रही है।

सोशल मीडिया पर बंटी हुई राय

पोस्ट वायरल होने के बाद ज्यादातर लोगों ने NRI दोस्त की बात से सहमति जताई। एक यूजर ने लिखा कि वो खुद बे एरिया और न्यूयॉर्क में रह चुका है और ये सब सच है, भले ही सुनने में अजीब लगे। दूसरे ने कहा कि संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिकता को जोड़ें तो भारत में रहना और भी फायदेमंद लगता है।

कुछ यूजर्स ने उल्टा तर्क दिया। एक ने कहा कि हवा की क्वालिटी और पैदल चलने योग्य सार्वजनिक जगहों में न्यूयॉर्क बहुत आगे है। दूसरे ने चुटकी ली कि दोस्त खुश करने के लिए अच्छी-अच्छी बातें कर रहा है, पूछो तो क्या वो हमेशा के लिए लौटना चाहता है?

पिछले महीने भी लौटा एक NRI परिवार

ये कोई पहला मामला नहीं है। पिछले महीने इंस्टाग्राम पर एक NRI दंपति का वीडियो वायरल हुआ था। अमेरिका में 17 साल रहने के बाद वो भारत लौट आए। वजह थी वहां की महंगी हेल्थकेयर सिस्टम, जो उनकी कमाई पर बोझ बन रही थी। कोई फैमिली सपोर्ट नहीं और बढ़ते खर्च ने उन्हें भारत वापसी का फैसला कराया, जहां इलाज आसान और किफायती है।

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