Paush Putrada Ekadashi पर करें तुलसी की मंजरी का एक छोटा-सा उपाय, जिससे खुलेंगे किस्मत के बंद दरवाजे

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 वैदिक पंचांग के अनुसार, पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर पौष पुत्रदा एकादशी व्रत किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही जीवन में सभी सुखों की प्राप्ति के लिए व्रत भी किया जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, पौष पुत्रदा एकादशी व्रत को विधिपूर्वक करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है और सभी पापों से मुक्ति मिलती है। अगर आप पौष पुत्रदा एकादशी के दिन धन की प्राप्ति चाहते हैं, तो तुलसी की मंजरी से जुड़े उपाय जरूर करें। ऐसा माना जाता है कि तुलसी की मंजरी के उपाय करने से किस्मत बंद दरवाजे खुल सकते हैं और जीवन में खुशियों का आगमन हो सकता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि पौष पुत्रदा एकादशी (Paush Putrada Ekadashi 2025 Upay) के दिन तुलसी की मंजरी के किन उपाय से शुभ फल की प्राप्ति होगी।

आर्थिक तंगी होगी दूर

अगर आप आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं, तो इस समस्या से मुक्ति पाने के लिए पौष पुत्रदा एकादशी का दिन शुभ माना जाता है। इस दिन तुलसी की मंजरी (Tulsi manjari Ke Upay) को लाल रंग के कपड़े में बांधकर मां लक्ष्मी को अर्पित करें। इसके बाद इसे पर्स या तिजोरी में रख दें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस उपाय को करने से जीवन में कभी भी धन की कमी नहीं होगी और धन लाभ के योग बनते हैं।

भगवान विष्णु होंगे प्रसन्न

धन की प्राप्ति के लिए पौष पुत्रदा एकादशी के दिन तुलसी की मंजरी और दूध से जगत के पालनहार भगवान विष्णु का अभिषेक करें। दीपक जलाकर पूजा-अर्चना करें और मंत्रों का जप करें। ऐसा माना जाता है कि इस उपाय को करने से धन लाभ के योग बनते हैं और भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं।

घर में होगा सुख-शांति का वास

अगर घर आपके घर में लड़ाई-झगड़े की स्थिति बनी रहती है, तो ऐसे में एकादशी के दिन गंगाजल में तुलसी की मंजरी मिलाकर घर में छिड़क दें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस उपाय को करने से घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

पौष पुत्रदा एकादशी 2025 डेट और शुभ मुहूर्त (Paush Putrada Ekadashi 2025 Date and Shubh Muhurat)

वैदिक पंचांग के अनुसार, पौष पुत्रदा एकादशी व्रत 30 दिसंबर को किया जाएगा।
पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत- 30 दिसंबर को सुबह 07 बजकर 50 मिनट पर
पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का समापन- 31 दिसंबर को सुबह 05 बजे

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