‘भारत एक हिंदू राष्ट्र है, इसे संवैधानिक प्रमाण की जरूरत नहीं’, मोहन भागवत का बड़ा बयान

2.0kViews
1112 Shares

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार, 21 दिसंबर को एक इवेंट के दौरान कहा कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है और इस बात को किसी संवैधानिक प्रमाण की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यही सत्य है।

आरएसएस के 100 साल पूरे होने पर एक कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने यह बात कही है। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है और तब तक एक हिंदू राष्ट्र ही बना रहेगा, जब तक इस देश में भारतीय संस्कृति का सम्मान किया जाएगा।

भारत एक हिंदू राष्ट्र है’

मोहन भागवत ने कोलकाता में हुए 100 व्याख्यान माला कार्यक्रम के दौरान कहा कि सूर्य पूर्व से उगता है और हम नहीं जानते कि ऐसा कब से हो रहा है। तो क्या हमें इस बात के प्रमाण के लिए संविधान की जरूरत है। इसी तरह हिंदुस्तान भी एक हिंदू राष्ट्र है।

मोहन भागवत ने आगे कहा कि संघ की विचारधारा है कि जो कोई भी भारत को अपनी मातृभूमि मानता है, वह भारतीय संस्कृति की इज्जत करता है। जब तक इस हिंदुस्तान की धरती पर एक भी व्यक्ति जिंदा है जो भारतीय पूर्वजों की महिमा में विश्वास रखता है और उसका सम्मान करता है, तब तक भारत एक हिंदू राष्ट्र है।

जन्म पर आधारित जाति व्यवस्था पहचान नहीं

मोहन भागवत ने अपने संबोधन के दौरान आगे कहा कि अगर संसद भी कभी संविधान में संशोधन करके इस शब्द को जोड़ दे, चाहे वह ऐसा करें या न करें, कोई बात नहीं, क्योंकि हमें उस शब्द से कोई फर्क नहीं पड़ता। हम हिंदू हैं और हमारा देश हिंदू राष्ट्र है, यही सच है। जन्म पर आधारित जाति व्यवस्था हिंदुत्व की पहचान नहीं है।

आरएसएस प्रमुख ने आगे कहा कि ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द मूल रूप से संविधान की प्रस्तावना का हिस्सा नहीं था, लेकिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समय में आपातकाल के दौरान संविधान (42वें संशोधन) अधिनियम, 1976 द्वारा इसे ‘समाजवादी’ शब्द के साथ जोड़ा गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *