कृषि विभाग ने खाद की कालाबाजारी रोकने और जरूरतमंद किसानों तक उचित मात्रा में उर्वरक पहुंचाने के लिए वितरण प्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत अब किसानों को उनकी भूमि की जोत (खतौनी) के आधार पर ही खाद मुहैया कराई जाएगी।
पहले जितना किसान चाहते थे, उतना मिलता था। लेकिन कालाबाजारी रोकने के लिए यह नई व्यवस्था लागू की गई है। इस योजना से जिले के पांच लाख 27 हजार किसान व बटायीदार लाभांन्वित होंगे।
विभाग द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार, एक हेक्टेयर कृषि भूमि वाले किसान को अधिकतम सात बोरी यूरिया दी जाएगी। अक्सर देखा जाता है कि रबी और खरीफ सीजन के दौरान खाद की भारी मांग का फायदा उठाकर कुछ लोग ऊंचे दामों पर खाद बेचते हैं या स्टाक जमा कर लेते हैं।
इस समस्या से निपटने के लिए प्रशासन ने अब जितनी जमीन, उतनी खाद का फार्मूला लागू किया है। पीओएस मशीन के माध्यम से होने वाली बिक्री को अब सीधे किसान के भू-लेख रिकार्ड से जोड़ा जा रहा है।
पारदर्शिता के लिए उठाया गया कदम
अक्सर देखा जाता है कि रबी और खरीफ सीजन के दौरान खाद की भारी मांग का फायदा उठाकर कुछ लोग ऊंचे दामों पर खाद बेचते हैं या स्टॉक जमा कर लेते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए कृषि विभाग ने अब जितनी जमीन, उतनी खाद का फार्मूला लागू किया है। पीओएस मशीन के माध्यम से होने वाली बिक्री को अब सीधे किसान के भू-लेख रिकार्ड से जोड़ा जा रहा है।
किसे कितनी मिलेगी खाद
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, फसल की आवश्यकता और वैज्ञानिक मानकों के आधार पर खाद का कोटा तय किया गया है। एक हेक्टेयर तक जोत वाले किसान को अधिकतम सात बोरी यूरिया मिलेगी। छोटे एवं सीमांत किसानों को जोत के अनुपात में 2 से 5 बोरी। बड़े किसान जिनके पास एक हेक्टेयर से अधिक भूमि होने पर खतौनी पेश करने के बाद अतिरिक्त खाद मिल सकेगी, लेकिन इसके लिए सत्यापन अनिवार्य होगा।
खाद लेने के लिए किसानों को अपनी खतौनी की छायाप्रति और आधार कार्ड साथ लाना होगा। समिति केंद्रों पर अंगूठा लगाने के बाद ही खाद का वितरण किया जाएगा। यदि कोई किसान निर्धारित कोटे से अधिक खाद की मांग करता है, तो उसे संबंधित कृषि पर्यवेक्षक या राजस्व विभाग से विशेष अनुमति लेनी होगी।

