भोपाल में बड़े तालाब के शिकारे पर नाव माफिया का ग्रहण, पर्यटकों को कर रहे गुमराह

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राजधानी के बड़े तालाब की अथाह जलराशि पर इस महीने की शुरुआत में शुरू हुई शिकारा सेवा माफिया के जाल में फंस गई है। पहले से तालाब पर नावों का संचालन कर रहा यह गिरोह पूरी योजना को पलीता लगा रहा है। इनकी वजह से शिकारा का आनंद लेने पहुंचे लोग बेहद खराब अनुभव से दोचार हो रहे हैं। नवदुनिया ने शनिवार को इसकी पड़ताल की तो इस बदमाशी की तस्वीर सामने आई।

गेट से ही करने लगते हैं गुमराह

सामने आया कि निजी नाव संचालकों के लोग गेट पर ही खड़े हैं। बोट क्लब में घुसने वालों को वहीं से पूछने और अपनी नावों की ओर ले जाने में जुट गए हैं। एक दूसरा समूह बोट क्लब प्रबंधक की मौजूदगी में टिकट खिड़की के सामने ही पर्यटकों को भ्रमित करने में लगा है। वे अपनी नावों को शिकारा बताकर पर्यटकों को उधर खींच ले जा रहे हैं। ऐसा करने पर उन्हें पर्यटन विकास निगम के कारिंदे टोकते भी नहीं। इसकी वजह से पर्यटक उनकी बात को सच मानकार उनके साथ हो लेता है। साफ नजर आता है कि यह सब मिलीभगत से चल रहा है।

शिकारे में सैर की भी पूरी सेवा नहीं

कोई पर्यटक उनकी अनदेखी कर शिकारा का टिकट लेकर उसमें बैठ जाता है तो उसे दूसरी असुविधा का सामना करना पड़ता है। 300 रुपये के टिकट पर 20 मिनट की शिकारा राइड उपलब्ध है। लेकिन शिकारा चलाने वाले पांच-सात मिनट तालाब के किनारों को घुमाकर पर्यटकों को उतार दे रहे हैं। शिकायत करने पर विवाद हो रहा है।

शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं

शाम करीब पौने चार बजे एक पर्यटक बोट क्लब के प्रबंधक वसीम के पास पहुंचा। उसकी शिकायत कि शिकारा चालक उसे सिर्फ तालाब के किनारे घुमाकर वापस छोड़ गया है। प्रबंधक वसीम ने पर्यटक को जेट्टी पर संचालन देख रहे दीक्षित के पास जाने का सुझाव दिया। पर्यटक ने कहा कि दीक्षित ने ही उसे आपके पास भेजा है, तो मैनेजर ने हाथ खड़े कर दिए। कहा कि वह इस मामले में कुछ नहीं कर सकता। अंततः पर्यटक ने हाथ जोड़कर कहा— “मेरी ही गलती है जो मैं बोट क्लब आया।

बोट क्लब प्रबंधक वसीम का कहना है कि शिकारा की संख्या कम है और शाम के समय पर्यटकों की संख्या ज्यादा हो जाती है। इन दिनों अंधेरा भी जल्दी हो रहा है, इसलिए संचालन जल्दी बंद करना पड़ता है। इसी वजह से पर्यटकों को समय पर शिकारा नहीं मिल पाता और अव्यवस्था की स्थिति बनती है। संचालन से जुड़े एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वर्तमान में शिकारा चलाने वाले वही लोग हैं जो यहां नाव चला रहे थे। वे इसे अपने धंधे पर चोट की तरह देख रहे हैं। ऐसे में अपनी मनमर्जी से संचालन कर रहे हैं। किसी की सुनते नहीं हैं। पर्यटन विकास निगम सक्षम है कि वह अपने स्वयं के बोट चालक रखे, जिससे नियंत्रण और निर्देश देना आसान हो सके।

चारों तरफ निजी नाव संचालकों का कब्जा

बोट क्लब परिसर में चारों ओर निजी नाव संचालकों का दबदबा है। मुख्य द्वार पर ही दो-तीन लोग खड़े रहते हैं, जो अंदर आने वाले पर्यटकों से कहते हैं— “बोटिंग करनी है तो उधर बोट है।” इसके बावजूद अगर कोई पर्यटक टिकट विंडो तक पहुंच भी जाता है, तो वहां भी इनके लोग मौजूद रहते हैं, जो पर्यटकों को भ्रमित कर निजी बोटों की ओर ले जाते हैं।

पर्यटक का बुरा अनुभव

पर्यटक रोहित सावले बताते हैं कि जब उन्होंने सुना कि बोट क्लब पर शिकारा चल रहा है, तो वे अपनी भांजी के साथ पहुंचे। उन्होंने 300 रुपये में 20 मिनट के लिए शिकारा लिया, लेकिन चालक ने सिर्फ पांच मिनट तक शिकारा चलाया और आगे किनारे पर ले जाकर खड़ा कर दिया। वहीं खड़े होकर वह गुटखा खाता रहा। जब उन्होंने चालक से आगे तक ले जाने को कहा, जहां तक जाने का निशान लगा है, तो उसने मना कर दिया। रोहित का कहना है कि “यहां शिकारा के नाम पर पूरा स्कैम चल रहा है। इस व्यवहार से शहर की छवि खराब हो रही है।”

जल पर्यटन की महत्वाकांक्षी परियोजना

मप्र पर्यटन विकास निगम बोट क्लब पर जल पर्यटन बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। एनजीटी के आदेश की वजह से सितंबर 2023 से ही क्रूज़ सेवा और मोटर-बोट संचालन बंद है। इस कमी को पूरा करने के लिए पहले वाटर साइकिल लाई गई, लेकिन वह भी पर्यटकों को खास आकर्षित नहीं कर पाई। इसके बाद निगम ने कश्मीरी शिकारा के रूप में 20 नए शिकारे लगभग 48 लाख रुपये की लागत से खरीदे। ये शिकारे पर्यावरण-अनुकूल फाइबर री-इन्फोर्स्ड पॉलीयूरिथेन सामग्री से तैयार किए गए हैं। चार दिसंबर को ही मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने इनका लोकार्पण किया था।

निगम के पास जवाब नहीं

मप्र पर्यटन विकास निगम के जनसंपर्क अधिकारी विकास खरे से जब इस संबंध में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा— “पता करके बताता हूं, थोड़ा समय दीजिए।” इसके बाद उनका कोई जवाब नहीं आया।

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