युवती कौन थी… किसने उसकी पहचान मिटा दी, गोरखपुर पुलिस को नहीं मिला जवाब

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 वाराणसी हाईवे पर छह फरवरी 2025 की सुबह गगहा क्षेत्र में धुंध के बीच 24 वर्षीय युवती का शव मिला तो पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।मौके पर खून के धब्बे और हड्डियों के टुकड़े इस बात की गवाही दे रहे थे कि हत्या बेहद बर्बरता से की गई थी। युवती का चेहरा इस कदर कुचला गया था कि उसकी पहचान करना संभव नहीं रहा।

यही वजह थी कि पुलिस की पूरी जांच पहचान स्थापित करने के पहले चरण में ही उलझ गई। 10 माह तक डीएनए मिलान, गुमशुदगी रिपोर्टों की पड़ताल और तकनीकी साक्ष्यों की जांच के बाद भी न मृतका की पहचान हो सकी, न ही हत्यारों तक कोई सुराग मिला। अंततः पुलिस ने विवेचना फाइल बंद कर दी, लेकिन वारदात का रहस्य आज भी जस का तस बना हुआ है।

घटनास्थल की शुरुआती जांच में पुलिस ने पाया कि युवती ने जींस, मोजे, स्वेटर और टोपी पहन रखी थी। इससे अनुमान लगाया गया कि वह किसी मध्यमवर्गीय परिवार की रही होगी। लेकिन जब गोरखपुर, देवरिया, संतकबीरनगर, कुशीनगर और बस्ती सहित आसपास के जिलों से गुमशुदगी की रिपोर्टें मंगाई गईं, तो किसी भी विवरण का मेल उससे नहीं बैठा। पहचान न मिल पाने से जांच पहले दिन से ही ठहरने लगी।

स्थानीय लोगों के मुताबिक रात में किसी तरह की चीख-पुकार या असामान्य गतिविधि नहीं हुई। इसका मतलब यह निकाला गया कि या तो युवती की हत्या कहीं और कर शव यहां फेंका गया, या फिर अपराधियों ने रात के सबसे सुनसान समय को चुना ताकि किसी को भनक न लगे। हाईवे की तेज रफ्तार गाड़ियों के शोर में किसी को कुछ समझ नहीं आया। फोरेंसिक टीम ने मौके से खून, मिट्टी और हड्डियों के टुकड़ों के नमूने लिए। युवती का डीएनए प्रोफाइल तैयार किया गया लेकिन कोई मेल नहीं मिला। यही स्थिति सीसी कैमराें के फुटेज में भी रही।

आस-पास लगे कैमरों की फुटेज धुंध और दूरी की वजह से धुंधली थी, इसलिए किसी संदिग्ध वाहन या व्यक्ति की स्पष्ट पहचान नहीं हो सकी। पुलिस ने मामले में कई कोण तलाशे – रिश्तों में विवाद, किसी परिचित द्वारा हत्या, अपहरण और फिर हत्या, मानव तस्करी, अथवा बदला लेने की वारदात। लेकिन युवती का नाम और पृष्ठभूमि न मिलने से इन कोणों पर भी आगे बढ़ना मुश्किल होता गया।

एक तरफ हत्या की क्रूरता स्पष्ट थी, दूसरी ओर मृतका की कोई पहचान न होने से सुराग लगातार हाथ से फिसलते रहे। शुरूआती दिनों में गगहा पुलिस ने दर्जनों लोगों से पूछताछ की, कई जिलों में फोटो और विवरण भेजे, तकनीकी का सहारा लिया और उपलब्ध सभी संभावित बिंदुओं की जांच की। लेकिन केस की सबसे मजबूत कड़ी युवती की पहचान जब नहीं हुई तो विवेचना धीरे-धीरे निष्कर्षहीन होती चली गई।

अंततः, सभी जांच बिंदुओं पर कार्यवाही पूरी करने और कही से कोई नई जानकारी न मिल पाने पर पुलिस ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत विवेचना फाइल बंद कर दी। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि यदि भविष्य में किसी गुमशुदगी रिपोर्ट के आधार पर कोई नई सूचना मिलती है, तो मामले को दोबारा खोला जा सकता है। वह युवती कौन थी, और किसने उसकी पहचान तक मिटा दी? यह जानने की कोशिश में पुलिस ने 10 माह लगाए, लेकिन जवाब आज भी धुंध में ही खोया हुआ है।

1500 वाहनों की जांच,फिर भी सुराग नहीं
पुलिस ने वारदात की रात हाईवे से गुजरने वाले 1500 से अधिक वाहनों की जांच की। टोल प्लाजा, पेट्रोल पंप और सीसीटीवी रिकॉर्ड के आधार पर वाहनों की मूवमेंट खंगाली गई। तकनीकी सेल ने क्षेत्र में सक्रिय 100 से अधिक मोबाइल नंबर चिन्हित किए और इनकी लोकेशन तथा कॉल डिटेल खंगाली गई, लेकिन कोई भी नंबर या वाहन वारदात से नहीं जुड़ सका। तमाम तकनीकी प्रयासों के बावजूद जांच इसी बिंदु पर आकर थम गई।

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