NCR से गाड़ियां चुराने वाले गिरोह का पर्दाफाश, मुठभेड़ में सरगना समेत तीन गिरफ्तार

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एनसीआर में वाहन चोरी करने वाले अंतरराज्यीय पंकज बिहारी गिरोह का फेज दो थाना पुलिस ने सोमवार को पर्दाफाश किया। सेक्टर 92 की सर्विस रोड पर मुठभेड़ के दौरान गिरोह का सरगना पैर में गोली लगने से घायल हो गया। अन्य दो बदमाशों को घेराबंदी कर दबोचा।

आरोपितों से थाना क्षेत्र से 27 नवंबर को चोरी हुई कैब समेत चार कार, 91 हजार रुपये, मोबाइल, एटीएम कार्ड, तमंचा, दो कारतूस बरामद किए। आरोपित कार बेचने जाने के दौरान पुलिस के हत्थे चढ़े। आरोपितों पर 14 मुकदमे दर्ज हैं। सभी कम पढ़े लिखे और टैक्सी ड्राइवर हैं।

फेज दो थाना क्षेत्र से 27 नवंबर की देर रात बदमाश एक कैब चोरी कर ले गए थे। एसीपी उमेश कुमार के नेतृत्व में थाना और सीआरटी समेत तीन टीम बदमाशों की तलाश में जुटी थी। सर्विलांस और गोपनीय सूचना पर पुलिस को बदमाशों के सोमवार सुबह सेक्टर 92 से गुजरने का पता चला।

पुलिस को देख करने लगे फायरिंग

सर्विस रोड पर चेकिंग करने के दौरान पुलिस का सामना कार सवार तीन बदमाशों से हुआ। पुलिस को देखकर भागने के दौरान बदमाशों ने फायरिंग की। पुलिस की जबावी कार्रवाई में एक बदमाश पैर में गोली लगने से घायल हो गया। उसके दो साथियों को घेराबंदी कर धर लिए। डीसीपी सेंट्रल नोएडा शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि घायल बदमाश की पहचान बिहार समस्तीपुर उझायरपुर के पंकज, मध्य प्रदेश भिंड के भट्टमासपुरा के विवेक यादव व मध्यापुर गांव के प्रेमपाल यादव के रूप में हुई। तीनों दिल्ली व गुरुग्राम में किराये पर रहते हैं।

पूछताछ में पता चला है कि पंकज पांचवीं, विवेक आठवीं व प्रेमपाल नौवीं कक्षा पास है। तीनों शातिर किस्म के अपराधी हैं। गिरोह का सरगना पंकज है। तीनों मिलकर एनसीआर में सुनसान जगह पर खड़े वाहनों की रेकी करते हैं। तीनों ने 27 नवंबर को थाना क्षेत्र से कैब को चोरी किया था।

उसके बाद अपनी कार को गुप्त जगह पर छिपाकर कैब से भिंड, समस्तीपुर और प्रदेश के कई जगहों पर गए थे, लेकिन वहां पर कार नहीं बिक सकी थी। तीनों सोमवार को अपनी कार और कैब को दिल्ली बेचने जाने के दौरान पुलिस से टकरा गए। अन्य तीन वाहनों को दिल्ली व फेज तीन थाना क्षेत्र से चोरी किया था।

टोल से बचने को गांव देहात हैं गुजरते

थाना प्रभारी विन्ध्यांचल तिवारी ने बताया कि चोरी कर वाहनों को गुप्त जगह पर एकत्रित करते हैं। अन्य राज्यों में वाहनों को बेचने का प्रयास करते हैं। टोल व पुलिस की निगरानी से बचने के लिए गांव देहात के कच्चे रास्तों का इस्तेमाल करते हैं। एक-दूसरे वॉट्सएप कॉल से बात करते हैं।

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