विज्ञानियों ने मन बदलने वाले ‘मस्तिष्क हथियार’ को लेकर दी चेतावनी, कैसे बन सकता है खतरा?

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 ऐसे हथियार जो आपके मन पर नियंत्रण कर सकें, सुनने में भले ही काल्पनिक लगें, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ये वास्तविकता बनते जा रहे हैं। विज्ञानियों ने मन को बदलने वाले ‘मस्तिष्क हथियारों (Brain Weapon) के बारे में एक गंभीर चेतावनी जारी की है, जो आपकी धारणा, स्मृति और यहां तक कि व्यवहार को भी प्रभावित कर सकते हैं।

ब्रैडफोर्ड यूनिवर्सिटी के डा. माइकल काली और प्रोफेसर मैल्कम डैंडो ने एक नई प्रकाशित पुस्तक में इस विषय पर दुनिया को आगाह किया है। इस सप्ताहांत वे हेग में होने वाले रासायनिक हथियार सम्मेलन में इस मुद्दे को उठाएंगे।

नियमों में खामी

शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि विश्व की मुख्य ताकतें रासायनिक हथियारों के उपयोग को नियंत्रित करने वाले नियमों में एक खामी का फायदा उठाकर ऐसे हथियार विकसित कर रहे हैं। रासायनिक हथियार सम्मेलन युद्ध में हानिकारक रसायनों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाता है, लेकिन विशेष परिस्थितियों में कुछ रसायनों के इस्तेमाल की अनुमति देता है।

हथियारों पर शोध

अमेरिका, चीन, रूस और ब्रिटेन जैसे देश 1950 के दशक से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (सीएनएस) पर काम करने वाले हथियारों पर शोध कर रहे हैं। उनका उद्देश्य लोगों को लंबे समय तक अशक्त बनाना है, जिसमें बेहोशी, मतिभ्रम, लकवा और भटकाव शामिल है। केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में हेरफेर करने वाले उपकरण अधिक सटीक, अधिक सुलभ होते जा रहे हैं जिससे देशों में इसके प्रति आकर्षण बढ़ रहा है।

तंत्रिका विज्ञान का शस्त्रीकरण

जैविक और रासायनिक हथियारों पर नियंत्रण के विशेषज्ञ प्रोफेसर हैंडो ने बताया कि विज्ञानी मस्तिष्क के ‘अस्तित्व सर्किट’ के कुछ हिस्सों की जांच कर रहे हैं, जो तंत्रिका पथ हैं। यह भय, नींद, आक्रामकता और निर्णय लेने को नियंत्रित करते हैं । इन सर्किटों की कार्यप्रणाली को समझना तंत्रिका संबंधी स्थितियों के इलाज के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन यह मस्तिष्क के इन क्षेत्रों को हथियार बनाने का मार्ग भी प्रशस्त करता है।

इसका उपयोग संज्ञान को बाधित करने, अनुपालन को प्रेरित करने, या भविष्य में लोगों को अनजाने में निष्क्रिय करने के लिए किया जा सकता है। आधुनिक तंत्रिका विज्ञान इतनी उन्नत हो गई है कि सचमुच भयानक मानसिक हथियार बनाए जा सकते हैं। तंत्रिका विज्ञान के शस्त्रीकरण को रोकने के लिए तत्काल वैश्विक कार्रवाई की आवश्यकता है।

मतिभ्रम व अक्षम करता है अमेरिका का ‘बीजेड’ व चीन का ‘नार्कोसिस – गन’

अमेरिकी सेना ने ‘बीजेड’ नामक यौगिक विकसित किया है, जो प्रलाप, मतिभ्रम और संज्ञानात्मक शिथिलता की तीव्र अनुभूति पैदा करता है। अमेरिका ने लगभग 60,000 किलोग्राम इस शक्तिशाली दवा का निर्माण किया और इसका उपयोग 340 किलोग्राम के क्लस्टर बम बनाने में किया। इस बम का इस्तेमाल 1955 में वियतनाम में किया जाना था ।

बीजेड का अमेरिकी सैनिकों पर गहन परीक्षण किया गया था, लेकिन इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि इस हथियार का कभी इस्तेमाल किया गया था। इसी तरह, चीनी सेना ने एक ‘नार्कोसिस-गन’ विकसित की है, जो अक्षम करने वाले रसायनों की सीरिंज दागने के लिए डिजाइन की गई है।

पहली बार रूस ने किया था मस्तिष्क हथियार का इस्तेमाल

सीएनएस – लक्ष्यीकरण हथियार का इस्तेमाल युद्ध में केवल एक बार किया गया है। 2002 में मास्को थिएटर घेराबंदी के दौरान, रूसी सुरक्षा बलों ने सशस्त्र चेचन उग्रवादियों को निष्क्रिय करने के लिए इसका उपयोग किया था। चेचन उग्रवादियों ने 900 नागरिकों को बंधक बनाया था।

अंदर मौजूद बंदूकधारियों को बेहोश करने के लिए रूस ने फेंटेनाइल डेरिवेटिव युक्त गैस का इस्तेमाल किया था। इस गैस की वजह से 900 बंधकों में से 120 लोग भी मारे गए। वहीं कई लोगों को दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा। हालांकि, तब से इन हथियारों की दिमागी क्षमता केवल हमलावरों को बेहोश करने या मतिभ्रम पैदा करने से कहीं आगे तक फैल गई है जिसे लेकर विज्ञानी चिंतित हैं।

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