अगर आप भी रोज देर रात तक मोबाइल चलाने, काम खत्म करने या बस वक्त निकालने के चक्कर में छह घंटे से कम सोते हैं, तो यह आदत धीरे-धीरे आपके शरीर के अंदर ऐसी हलचल पैदा करती है, जिसका असर लंबे समय तक महसूस होता है। शुरुआत में यह बस थकान, चिड़चिड़ापन या भारीपन जैसा लगता है, लेकिन असल नुकसान तो भीतर शुरू हो चुका होता है। आइए, डॉ. अजय कुमार गुप्ता (मैक्स सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल, वैशाली में इंटरनल मेडिसिन के डिपार्टमेंट हेड) से जानते हैं इस बारे में।
शरीर का रीसेट बटन है नींद
नींद सिर्फ आराम नहीं, बल्कि वह समय है जब शरीर खुद को ठीक करता है, हार्मोन संतुलित करता है और दिमाग से टॉक्सिन्स को साफ करता है। जब रोजाना छह घंटे से कम सोया जाता है, तो यह पूरा तंत्र बिगड़ने लगता है।

