वायु प्रदूषण को सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता है। यह एक देश नहीं बल्कि इंडो-गंगा मैदान, हिमालय की तराई और हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र की समस्या है। इसकी चुनौतियों का समाधान केवल क्षेत्रीय सहयोग से ही संभव है। इसके लिए ‘एयरशेड’ मॉडल जरूरी है।
सीमा पार प्रदूषण से निपटने को गुरुवार को संचार विशेषज्ञ, नीति-निर्माता, तकनीकी जानकार और मीडिया प्रतिनिधि एक मंच पर जुटे। सभी इस बात पर एकमत थे कि सरकार के समर्थन व जनसहभागिता के बिना इससे निपटना संभव नहीं है।
भारत, नेपाल, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, चीन, म्यांमार व पाकिस्तान के सहयोग से बनी इंटरनेशनल सेंटर फार इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (आइसीआइएमओडी) द्वारा काठमांडू में दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई है।
कार्यशाला में संस्था के महानिदेशक पेमा ग्याम्त्शो ने कहा कि वायु प्रदूषण के समाधान हैं, बस हमें इस पर गंभीरता से ध्यान देना होगा। हमें अपनी आदतों में बदलाव लाना होगा। संस्था, भूटान और नेपाल के साथ मिलकर एक क्लीन एयर एक्शन प्लान भी तैयार कर रही है।

