क्या कभी ऐसा हुआ है कि आपने डाइटिंग शुरू की, कुछ किलो कम भी कर लिए, लेकिन देखते ही देखते वजन फिर वापस आ गया? बहुत लोग इसे अपनी सेल्फ कंट्रोल की कमी समझते हैं, लेकिन साइंस कहता है कि असली कारण आपकी इच्छाशक्ति नहीं, बल्कि आपका दिमाग (Brain’s Role in Weight Loss) है।
जी हां, यूनिवर्सिटी ऑफ कोपेनहेगन के शोधकर्ता बताते हैं कि वजन घटाना (Weight Loss) सेल्फ कंट्रोल बनाए रखने की लड़ाई नहीं, बल्कि एक न्यूरोबायोलॉजिकल वॉर है, जिसमें दिमाग अक्सर वजन घटाने के खिलाफ काम करता है।
दिमाग क्यों कम नहीं होने देता वजन?
यह सब हमारे पूर्वजों की विरासत है। लाखों साल पहले जब खाना हर समय उपलब्ध नहीं होता था, तब शरीर ने फैट को सुरक्षा कवच की तरह जमा करना शुरू किया। यानी खाने की कमी- खतरा, फैट- सुरक्षा। आज भले ही खाना हर जगह आसानी से मिल जाता है, लेकिन दिमाग अब भी पुराने सिस्टम पर काम करता है। इसलिए जैसे ही आप वजन घटाने की कोशिश करते हैं, दिमाग खतरे का अलार्म बजा देता है।
इसका असर तीन तरह से दिखता है-
- भूख बढ़ जाती है- डाइटिंग शुरू करते ही घ्रेलिन जैसे हार्मोन बढ़ जाते हैं, जिससे लगातार भूख लगती है।
- एनर्जी का खर्च कम हो जाता है- शरीर कैलोरी बचाने की कोशिश करता है, यानी आप पहले की तुलना में कम कैलोरी बर्न करते हैं।
- दिमाग पुराना वजन ‘याद’ रखता है- यह शरीर का सेट-पॉइंट वजन होता है। दिमाग कोशिश करता है कि वजन उसी पर वापस आ जाए, चाहे आप कितना भी कोशिश कर लें।
यही वजह है कि वजन कम करना उतना मुश्किल नहीं है, जितना उसे बनाए रखना। क्योंकि दिमाग बार-बार शरीर को पुराने वजन पर लाने की कोशिश करता है।

