भंसाली ने कहा कि त्योहारों के लिए अधिकांश स्टॉक 27 अगस्त से पहले ही तैयार हो चुका था,

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मौजूदा साल में सोने की कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली है। खासकर अक्टूबर के महीने में विदेशी और घरेलू बाजारों में सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं। इसके कारण ज्वेलरी की कीमतें भी आसमान छू रही थीं। साथ ही, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ ने विदेशी बाजारों में भारत के जेम्स और ज्वेलरी के निर्यात को प्रभावित किया, जिससे अक्टूबर में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में निर्यात में करीब 31 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

उद्योग निकाय रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (GJEPC) के अनुसार, अक्टूबर 2025 में भारत का रत्न एवं आभूषण निर्यात 2168.05 मिलियन डॉलर (19,172.89 करोड़ रुपए) रह गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 3122.52 मिलियन डॉलर (26,237.1 करोड़ रुपए) था। GJEPC के अध्यक्ष किरित भंसाली ने बताया कि अक्टूबर में गिरावट का मुख्य कारण अमेरिकी टैरिफ लागू होने से पहले मांग में बढ़ोतरी के कारण स्टॉक जमा होना था।हीरों का निर्यात भी गिरा
अक्टूबर में कटे और पॉलिश किए हुए हीरों का निर्यात 26.97% घटकर 1,025.99 मिलियन डॉलर (9,071.41 करोड़ रुपए) रह गया, जबकि पिछले वर्ष यह 1,404.85 मिलियन डॉलर (11,806.45 करोड़ रुपए) था। पॉलिश किए गए और लैब में तैयार किए गए हीरों का निर्यात भी 34.90% घटकर 94.37 मिलियन डॉलर (834.45 करोड़ रुपए) हुआ, जबकि पिछले साल यह 144.96 मिलियन डॉलर (1,218.25 करोड़ रुपए) था।

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