कर्नाटक के अधिकतर मतदाता मानते हैं कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष होते हैं, यह सर्वेक्षण कांग्रेस को दे सकता है झटका

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 कर्नाटक सरकार की एक एजेंसी द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया है कि राज्य के चारों प्रशासनिक डिविजन के अधिकतर मतदाताओं का मानना है कि भारत में चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से आयोजित किए जाते हैं और ईवीएम सटीक परिणाम देती हैं।

यह निष्कर्ष कांग्रेस द्वारा ‘वोट चोरी’ के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं, जिसका नेतृत्व पार्टी के शीर्ष नेता राहुल गांधी कर रहे हैं। इस मुहिम के तहत राहुल गांधी केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा और चुनाव आयोग को निशाना बना रहे हैं।

यह सर्वेक्षण कर्नाटक निगरानी एवं मूल्यांकन प्राधिकरण (केएमईए) द्वारा कराए गए अध्ययन का हिस्सा है। अगस्त 2025 की सर्वेक्षण रिपोर्ट हाल ही में सार्वजनिक की गई है।

केएमईए योजना, कार्यक्रम निगरानी एवं सांख्यिकी विभाग के अधीन कार्य करता है और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को बढ़ावा देने के लिए राज्य की सर्वोच्च संस्था है। यह अध्ययन कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा मतदाता शिक्षा एवं चुनावी भागीदारी कार्यक्रम के प्रभाव का आकलन करने के लिए किया गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, 91.31 प्रतिशत मतदाताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि भारत में चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से आयोजित किए जाते हैं। 6.76 प्रतिशत ऐसे मतदाता भी थे, जिन्होंने तटस्थ विचार व्यक्त किए।

सर्वेक्षण के दौरान कर्नाटक के 102 विधानसभा क्षेत्रों में कुल 5100 मतदाताओं से उनकी राय जानी गई। इनमें राज्य के चार मंडलों-बेंगलुरु, बेलगावी, कलबर्गी और मैसुरू के ग्रामीण, शहरी और आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र शामिल थे।

यह निष्कर्ष ऐसे समय में सामने आया है, जब कर्नाटक सरकार ने ईवीएम के प्रति जनता के विश्वास में कथित गिरावट का हवाला देते हुए राज्य में सभी पंचायत और शहरी स्थानीय निकाय चुनावों को मतपत्र के माध्यम से आयोजित करने का प्रस्ताव रखा है।

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