दक्षिण अमेरिका के देश इक्वाडोर में एक बार फिर जेल हिंसा का भयावह रूप देखने को मिला है। मचला जेल में सोमवार को भड़के दंगों के बाद कम से कम 31 कैदी फांसी पर लटके हुए पाए गए, जबकि चार कैदियों को गोली मारकर हत्या की गई। अधिकारियों का कहना है कि बाकी कैदियों को या तो फांसी पर लटकाया गया या फिर गला घोंटकर मारा गया।गृह मंत्री ने जानकारी दी कि शाम करीब 6 बजे जेल परिसर में दर्जनों शव फंदों से लटके हुए मिले। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि विरोधी गैंगों के बीच खूनी संघर्ष हुआ, जिसमें प्रतिद्वंद्वी गिरोह ने अपने दुश्मनों को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया।
क्यों भड़का दंगा ?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार ने ड्रग्स माफिया और उनके सहयोगी कैदियों को दूसरी जेल में ट्रांसफर करने का निर्णय लिया था। मचला जेल में बंद गैंगस्टर्स ने इस फैसले का विरोध करते हुए हिंसा भड़का दी। गृह मंत्री ने बताया कि अब तक 300 खतरनाक कैदियों को दूसरी जेल में स्थानांतरित किया जा चुका है।मचला जेल में यह कोई पहली घटना नहीं है। साल 2020 से अब तक 500 से ज्यादा कैदी मारे जा चुके हैं। इक्वाडोर की जेलों में लंबे समय से ड्रग्स तस्करों और आपराधिक गैंगों के बीच संघर्ष जारी है।
देश में आपातकाल
घटना के बाद इक्वाडोर सरकार ने देशभर में आपातकाल की घोषणा कर दी है। राष्ट्रपति डैनियल नोबोआ ने कहा कि अपराधियों और गैंग्स के खिलाफ सख्त सैन्य कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कई संगठनों को आतंकी घोषित किया है और अपराधियों के प्रत्यर्पण अभियान भी तेज किए हैं। गौरतलब है कि अप्रैल में हुए राष्ट्रपति चुनाव में नोबोआ ने अपनी प्रतिद्वंद्वी लुइसा गोंजालेज को मामूली अंतर से हराया था। चुनाव के दौरान भी अपराध और हिंसा प्रमुख मुद्दे रहे। इक्वाडोर इस वक्त बेरोजगारी और बढ़ते अपराध की दोहरी चुनौती से जूझ रहा है।

