रूस में तबाही! यूक्रेनी ड्रोन अटैक से ब्लैक सी का तुआप्से बंदरगाह धधका, पोर्ट पर लगी भीषण आग

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यूक्रेन ने रूस पर एक बड़ा और भयंकर हवाई हमला किया है जिसके निशाने पर क्रास्नोडार के दक्षिणी क्षेत्र में ब्लैक-सी तट पर स्थित तुआप्से बंदरगाह था। यह हमला एक तेल टैंकर पर यूक्रेन के ड्रोन से किया गया जिससे भड़की आग ने पूरी बंदरगाह को अपनी चपेट में ले लिया। तुआप्से बंदरगाह रूस की प्रमुख ऑयल टर्मिनल (तेल निर्यात केंद्र) और बड़ी बंदरगाहों में से एक है जिस पर हुए इस हमले से रूस का निर्यात व्यापार (Export Trade) प्रभावित होने की आशंका है।

रूस की सप्लाई चेन को बाधित करने की कोशिश

रूस की ओर से लगाए गए आरोपों के अनुसार यूक्रेन की सेना पिछले कुछ महीनों से रूस की ईंधन आपूर्ति (Fuel Supply) और सैन्य रसद आपूर्ति (Military Logistics) को बाधित करने के प्रयास तेज़ कर रही है।

  • हमलों की तेज़ी: यूक्रेन ने रूसी रिफाइनरियों, डिपो और पाइपलाइनों पर हमले तेज़ किए हैं।
  • नुकसान: ताज़ा हमले में तुआप्से बंदरगाह की इमारतें नष्ट हुई हैं और कई तेल टैंकरों को नुकसान पहुंचा है जिससे रूस को आर्थिक नुकसान हुआ है।
  • आसपास का प्रभाव: ड्रोन अटैक के बाद गिरे मलबे से तुआप्से के बाहर सोस्नोवी गांव में एक अपार्टमेंट की बिल्डिंग भी क्षतिग्रस्त हुई है। हालांकि किसी जानी नुकसान की खबर नहीं है लेकिन तुआप्से रेलवे स्टेशन को भी आंशिक नुकसान पहुंचा है।

    यूक्रेन का मकसद: रूस की अर्थव्यवस्था को कमज़ोर करना

    यूक्रेन ने इस हमले को जायज़ ठहराते हुए इसे अपने पावर ग्रिड पर रूस के हवाई हमले का बदला बताया है। यूक्रेन का कहना है कि रूस ने हाल ही में यूक्रेन के न्यूक्लियर पावर स्टेशनों (Nuclear Power Stations) पर हमला किया था जिसमें 7 साल की बच्ची सहित 7 लोगों की जान गई थी और 18 लोग घायल हुए थे। यूक्रेन का मुख्य मकसद रूस पर हमला करके उसकी अर्थव्यवस्था को कमज़ोर करना और रूस पर शांति वार्ता (Peace Talks) करने के लिए दबाव बनाना है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के हवाले से कहा गया कि हमला करने वाले को जवाब दिए बिना जीत असंभव है और बराबरी (Parity) होने पर ही हार-जीत के मायने होंगे।

    शांति वार्ता की deadlock स्थिति

    रूस और यूक्रेन के बीच यह जंग फरवरी 2022 से चल रही है। युद्धविराम (Ceasefire) कराने के कई प्रयास किए जा चुके हैं लेकिन दोनों देश अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हैं। नतीजतन अब तक युद्धविराम नहीं हो पाया है और दोनों देश शांति वार्ता के लिए टेबल पर भी नहीं बैठ रहे हैं।

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