बजट का ‘सूखा’ पड़ने से गाजियाबाद के 108 गांवों में पेयजल योजना ठप, बढ़ाई गई डेडलाइन

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जल जीवन मिशन योजना के तहत जल निगम को नवंबर 2024 से बजट नहीं मिला है। इस कारण योजना का काम ठप हो गया है। जिले में 148 गांवों में से महज 40 गांवों में अधूरी तैयारी के साथ पानी की आपूर्ति सुचारू हुई है। जबकि 108 गांवों में काम अटका हुआ है। अब इस योजना की डेडलाइन मार्च 2025 से बढ़ाकर अब 2028 कर दी गई है। जिले में पांच लाख से अधिक ग्रामीणों को इस योजना का फायदा मिलना है।

जल जीवन मिशन योजना के तहत जिले के 148 गांवों में घर-घर पानी पहुंचाने की योजना है। गांवों में 50 किलो लीटर से 500 किलो लीटर क्षमता की टंकी बनाई जा रही हैं। यह योजना वर्ष 2019 में शुरू हुई थी लेकिन गाजियाबाद में यह योजना 2021 में शुरू हुई। डीपीआर में इस योजना के तहत 311 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित हुआ था।

अभी तक 74 गांवों की टंकी बनवाने के बाद उनमें पेयजल लाइन बिछाई का काम पूरा हुआ है लेेकन इन गांवों में पानी की आपूर्ति नहीं हो सकी है। काम पूर होने के बाद 40 गांवों में पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। 108 गांवों को अभी पानी मयस्सर नहीं हुआ है। मार्च 2025 तक इस सभी गांवों में काम पूरा किया जाना था।

इस योजना के लिए अब तक 223 करोड़ का बजट मिल चुका है। इसमें 55 प्रतिशत केंद्र सरकार और 45 प्रतिशत प्रदेश सरकार से बजट मिला है। निगम को नवंबर 2024 से बजट नहीं मिला। अभी केंद्र और राज्य सरकार से 80 करोड़ रुपये और मिलने हैं। इसके बाद भी काम शुरू हो सकेगा।

बजट नहीं मिलने के कारण योजना के काम की डेडलाइन बढ़ाकर वर्ष 2028 कर दी है। वहीं बजट मिलने पर निगम शेष बचे गांवों में पेयजल आपूर्ति का काम शुरू करेगा। जल निगम के अधिशासी अभियंता भारत भूषण ने बताया कि बजट मिलने पर काम शुरू किया जाएगा। काम पूरा करने की डेडलाइन वर्ष 2028 हो गई है।

नहीं तय किया गया शुल्क

कुछ गांवों में पहले से भी टंकी लगी हुई हैं। उन गांवों में 50 रुपये प्रति कनेक्शन शुल्क लिया जाता है। जल जीवन मिशन योजना के तहत अभी तक शुल्क तय नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि इस योजना के तहत 50 रुपये प्रति कनेक्शन का शुल्क लिया जा सकता है। योजना के शुरू होने पर ग्रामीणों के घरों में सुबह और शाम के समय दो-दो घंटे पानी की आपूर्ति की जानी है।

सुलझ गया दो गांवों का विवाद

विहंग और शाहजहांपुर गांव के लोग भी पेयजल लाइन बिछाने का विरोध कर रहे थे। इन गांवों में दूसरे गांवों की टंकी के पानी से आपूर्ति करने सहित कई अन्य कारणों से ग्रामीण विरोध कर रहे थे। वह अपने गांव में ही टंकी बनवाने की मांग कर रहे थे। निगम के समझाने पर इन गांवों के लोग भी मान गए हैं। इन गांवों में भी जल्द पेयजल बिछाने का काम शुरू किया गया था।

नंबर गेम

  •  45 प्रतिशत बजट प्रदेश सरकार से मिल चुका है
  •  55 प्रतिशत बजट केंद्र सरकार से मिल चुका है
  •  80 करोड़ रुपये और मिलेंगे निगम को
  •  311 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित हुआ था
  •  40 गांवों में पेयजल की आपूर्ति की जा रही

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