गाजा पर हमले के बाद इस्राइल को अमेरिकी समर्थन बंद करने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों में कोलंबिया विश्विविद्यालय केंद्र में था। विरोध प्रदर्शनों और उसके जवाब में किए गए विरोध प्रदर्शनों में यहूदी-विरोधी भावना और इस्लामोफोबिया के आरोप लगे थे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने यहूदी छात्रों के लगातार उत्पीड़न के मामले में निष्क्रियता बरतने के कारण कोलंबिया विश्वविद्यालय को दिए जाने वाले 40 करोड़ डॉलर (3,486 करोड़ रुपये) के अनुदान और अनुबंध को रद्द कर दिया है। यहूदी विरोधी भावना से निपटने के लिए संयुक्त टास्क फोर्स का गठन किया गया था, जिसमें न्याय, शिक्षा, स्वास्थ्य और मानव सेवा और सामान्य सेवा प्रशासन शामिल थे।
शुक्रवार टास्क फोर्स के सदस्य विभागों की तरफ से यह घोषणा की गई। इसमें यह भी कहा गया है कि विश्वविद्यालय के खिलाफ पहले चरण की कार्रवाई में ये अनुदान और अनुबंध रद्द किए गए हैं। टास्क फोर्स अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर अभी जांच जारी रखे है और आगे अभी इस तरह की और कार्रवाई हो सकती है।
पूर्व में ट्रंप ने दिया था ये आदेश
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी स्कूलों में यहूदी विरोध और ऐसी शिक्षा पर रोक लगाने का आदेश दिया था, जो नस्ल और लिंग-भेद को बढ़ावा देती है।गाजा पर हमले के बाद इस्राइल को अमेरिकी समर्थन बंद करने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों में कोलंबिया विश्विविद्यालय केंद्र में था। विरोध प्रदर्शनों और उसके जवाब में किए गए विरोध प्रदर्शनों में यहूदी-विरोधी भावना और इस्लामोफोबिया के आरोप लगे थे। कोलंबिया ने पहले कहा था कि उसने यहूदी-विरोधी भावना से निपटने के लिए प्रयास किए हैं।
व्हाइट हाउस के इस आदेश के जवाब में ओसीआर ने कोलंबिया और नॉर्थवेस्टर्न सहित पांच विश्वविद्यालयों में एक नई यहूदी विरोधी जांच शुरू की थी। सूत्रों ने बताया कि नया प्रशासन लगातार प्राथमिकताएँ बदल रहा है। ऐसे में फिलहाल दैनिक कार्य रोक दिया गया है। स्कूलों, कॉलेजों या शिकायत दर्ज कराने वालों के साथ वार्ता पर नए प्रतिबंध लगा दिए गए हैं।
इस बात का सता रहा डर
यहूदी विरोधी भावना और लैंगिक पहचान पर सख्ती के साथ ध्यान केंद्रित करने के ट्रंप प्रशासन के फैसले को लेकर विशेषज्ञों ने चिंता जाहिर की है। उन्हें डर है कि अब ओसीओआर नस्लीय भेदभाव और विकलांगता के आधार पर दुर्व्यवहार या इस्लामोफोबिया पर पर्याप्त ध्यान नहीं देगा। कार्यालय को अपने क्षेत्र में आने वाली सभी शिकायतों पर कार्रवाई करनी होती है, लेकिन राजनीति प्राथमिकताएं इनमें से यह तय करने और चुनने में आड़े आ सकती है कि किन मामलों को आगे बढ़ाया जाए।