धनतेरस पर लखनऊ के आलमबाग में सजा बर्तन बाजार, पीतल-तांबे के बर्तनों के दाम में 45 प्रतिशत तक बढ़ोतरी

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धनतेरस पर बर्तन खरीदने की परंपरा इस बार भी बाजार को नई उम्मीद दे रही है। त्योहार की तैयारियों के बीच बर्तन बाजार सजने लगा है। हालांकि पीतल और तांबे के बर्तनों की कीमतों में पिछले वर्ष के मुकाबले 35 से 45 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है, लेकिन ग्राहकों के पास खरीदारी के लिए कई विकल्प मौजूद हैं।

स्टील, एल्युमीनियम और लोहे के बर्तनों की कीमतों में मामूली इजाफा होने से कम बजट में भी धनतेरस की खरीदारी की जा सकती है। कारोबारियों को उम्मीद है कि त्योहार नजदीक आने के साथ बाजार में ग्राहकों की आवाजाही और बिक्री दोनों बढ़ेंगी।

बर्तन कारोबारियों के मुताबिक, कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण पीतल और तांबे के बर्तनों के दाम बढ़े हैं। पीतल के बर्तन इस समय 1200 से 1500 रुपये प्रति किलो और तांबे के बर्तन 1200 से 1900 रुपये प्रति किलो तक बिक रहे हैं।

पिछले वर्ष के मुकाबले पीतल में 35 से 40 प्रतिशत और तांबे में 40 से 45 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। वहीं स्टील के बर्तनों की कीमतों में दो से पांच प्रतिशत का ही अंतर आया है। इनका भाव करीब 250 रुपये प्रति किलो है। लोहे और एल्युमीनियम के बर्तनों की कीमतें भी लगभग पहले जैसी हैं।

बजट अनुसार खरीदारी के विकल्प

बाजार में इस बार ग्राहक अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से बर्तनों का चयन कर सकते हैं। पारंपरिक पीतल और तांबे के बर्तनों के साथ स्टील, लोहे और एल्युमीनियम के बर्तनों की भी अच्छी रेंज उपलब्ध है। कारोबारियों का कहना है कि त्योहार पर हर वर्ग के ग्राहक खरीदारी करता है। ऐसे में अलग-अलग कीमतों और डिजाइन के बर्तनों की उपलब्धता से बाजार में मांग बनी रहने की उम्मीद है।

जगमगाने लगा इलेक्ट्रॉनिक बाजार

दीपावली और धनतेरस पर इस्तेमाल होने वाली बिजली की झालर, लाई, गट्टा, दीये और अन्य पूजन सामग्री की कीमतों में इस बार कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है। तांबे की कीमतें बढ़ने के बावजूद झालरों के दाम नियंत्रित रखने के लिए निर्माता बदलाव कर रहे हैं। पहले पांच तारों वाली झालरों में अब तीन तारों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे कीमतों में विशेष बढ़ोतरी नहीं हुई है और ग्राहकों को राहत मिली है

ऑनलाइन बाजार के बीच स्थानीय दुकानदारों को त्योहार से आस

ऑनलाइन मार्केटिंग के बढ़ते प्रभाव के बीच स्थानीय दुकानदार भी ग्राहकों को आकर्षित करने की तैयारी में हैं। कारोबारी रामकुमार और सुशील सिंह का कहना है कि इस बार कच्चे माल की कीमतों और बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण बड़े व्यापारियों ने पहले की तुलना में कम ऑर्डर दिए हैं।

सामान्य तौर पर धनतेरस से दो महीने पहले ही ऑर्डर मिलने लगते थे और त्योहार से 15-20 दिन पहले माल की आपूर्ति हो जाती थी। इस बार कारोबारियों ने बाजार की स्थिति को देखते हुए सतर्कता बरती है। हालांकि उन्हें उम्मीद है कि धनतेरस के दिन पारंपरिक खरीदारी का उत्साह बाजार में रौनक बढ़ाएगा।

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