पेरिस के लूव्र को पछाड़ दुनिया के टॉप 10 में पटना म्यूजियम, मोनालिसा को टक्कर दे रही दीदारगंज यक्षी की खूबसूरती

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अगर आप सोचते हैं कि बिहार में घूमने के लिए है ही क्या, तो अब आपकी सोच बदलने वाली है। म्यूनिख की ट्रैवल पब्लिकेशन वर्थ ए जर्नी ने दुनिया के 100 बेस्ट म्यूजियम 2026 की लिस्ट जारी की है, जिसमें बिहार के पटना म्यूजियम ने 9वां स्थान हासिल किया है।

खास बात ये है कि इस सूची में ये भारत का इकलौता म्यूजियम है और एशिया के म्यूजियम्स के बीच पहला स्थान हासिल किया है। इतना ही नहीं, इसने पेरिस के लूव्र और न्यूयॉर्क के मेट्रोपोलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट को भी पछाड़ दिया है। आइए जानें पटना म्यूजियम में क्या खास है।

प्राचीन इतिहास और कला का संगम

पटना म्यूजियम विजिटर्स को बिहार के गौरवशाली इतिहास से परिचित करवाता है। यहां रखे हुए संग्रह में ऐतिहासिक कलाकृतियां, मूर्तियां, सिक्के, पांडुलिपियां और पुरातात्विक सामग्रियां शामिल हैं, जो पारंपरिक लोक और कंटेम्प्ररी आर्ट के साथ प्रदर्शित किए गए हैं। इसकी गैलरी में प्राचीन सभ्यताओं से लेकर 18वीं सदी तक की अलग-अलग कलाओं के इतिहास को देख सकते हैं।

दीदारगंज यक्षी

पेरिस का लूव्र म्यूजियम मोनालिसा की पेंटिंग के लिए मशहूर है। उसी तरह पटना म्यूजियम की शान दीदारगंज यक्षी की प्रतिमा मानी जाती है। इस प्रतिमा को 2000 साल पहले चुनार के एक ही बलुआ पत्थर से तराश कर बनाया गया, जो आज पटना म्यूजियम में एक रखी हुई है।

इस प्रतिमा का एक हाथ टूटा हुआ है और नाक भी थोड़ी टूट चुकी है, लेकिन फिर भी ये प्रतिमा इतनी खूबसूरत लगती है, मानो अभी इसमें जान भर जाएगी और ये बोलने लगेगी।

इतिहास को समेटे है ये म्यूजियम

दीदारगंजी यक्षी के अलावा, इस म्यूजियम में कूरकिहार कांस्य मूर्तियां, प्री-हिस्टोरिक पत्थरों के औजार और कुषाण काल की बुद्ध का जन्म शिला भी मौजूद है। 13.9 एकर में फैले इस संग्रहालय की शानदार इमारत को जापानी आर्किटेक्ट फुमियांहिको माकी और मुंबई-पुणे स्थित आर्किटेक्चरल फर्म स्टूडियो ओपोलिस ने तैयार किया है, जो देखने में बहुत ही खूबसूरत लगता है।

पटना म्यूजियम में और क्या सुविधाएं हैं?

विजिटर्स के लिए यहां और भी कई खास स्पेस बनाए गए हैं। बच्चों के लिए बनाई गई इस गैलरी में पशुओं, लोक कला, संस्कृति और विज्ञान से जुड़ी प्रदर्शनियां भी देखने को मिलती हैं। इसके अलावा, ये गैलरी दूसरे राज्यों से बिहार के जुड़ाव को भी बखूबी पेश करती है।

म्यूजियम के परिसर में एक रेस्टोरेंट भी है, जो पारंपरिक बिहारी खाना सर्व करता है। साथ ही, एक दुकान भी है जहां से सुविनियर्स और लोकल हैंडिक्राफ्ट्स खरीदे जा सकते हैं।

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