कालका-शिमला फोरलेन की हालत पर हिमाचल हाई कोर्ट सख्त, तारादेवी से कैथलीघाट के बीच तुरंत टारिंग का आदेश

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हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने शिमला-कालका राष्ट्रीय राजमार्ग पर चल रहे फोरलेन निर्माण और मरम्मत कार्यों में हो रही देरी को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को सख्त निर्देश दिए हैं कि सर्दियों का मौसम शुरू होने से पहले प्रभावित हिस्सों पर मरम्मत और फोरलेन का काम हर हाल में पूरा किया जाए।

मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने  जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किए।

तारादेवी से कैथलीघाट के बीच टारिंग करें
हाई कोर्ट ने विशेष रूप से संज्ञान लिया कि मानसून के बाद राजमार्ग के कई हिस्से बेहद खराब स्थिति में हैं, खासकर शोघी से तारादेवी के बीच का क्षेत्र। अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि तारादेवी से कैथलीघाट के बीच और अन्य प्रभावित हिस्सों में सड़कों पर तुरंत टारिंग (लुक डालने का काम) की जाए ताकि वाहन चालकों को दिक्कत का सामना न करना पड़े।

परियोजना निदेशक ने दाखिल की स्टेटस रिपोर्ट

सुनवाई के दौरान एनएचएआई के परियोजना निदेशक आनंद कुमार द्वारा दाखिल स्टेटस रिपोर्ट में विभिन्न कार्यों की प्रगति साझा की गई। चक्की मोड़ पर 260 मीटर लंबे वायाडक्ट (पुल) के निर्माण के लिए अनुबंध समझौते पर हस्ताक्षर होना बाकी है, लेकिन एक महीने के भीतर काम शुरू होने की उम्मीद है। पहाड़ी की तरफ ब्रेस्ट वॉल और घाटी की तरफ क्रैश बैरियर लगा दिए गए हैं।

कुल 44 में से 38 स्थानों पर काम पूरा हो चुका है। शेष 6 जगहों पर स्थानीय निवासियों द्वारा डाली गई बाधाओं के कारण इस काम को हटा दिया गया है।

समर हॉल के पास बेरखास गांव में रिटेनिंग वॉल का पुनर्निर्माण कर दिया गया है। यहां स्थायी बहाली के लिए वायाडक्ट निर्माण के टेंडर आमंत्रित किए गए हैं, जिसमें तकनीकी मूल्यांकन पूरा हो चुका है और वित्तीय मूल्यांकन जारी है। अपोलो टायर शोरूम के पास बन रहे मुख्य पुल का 54% काम पूरा हो चुका है, जिसे अप्रैल 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

विवाद सुलझने पर काम शुरू

वहीं, कंडाघाट में ठेकेदार के साथ चल रहे विवाद के सुलझने और 22 सितंबर 2026 को समझौता होने के बाद आरओबी-कम-वायाडक्ट का काम फिर शुरू हो गया है, जो सितंबर 2027 तक पूरा होगा।

अदालत ने जताई नाराजगी

अदालत ने नाराजगी व्यक्त की कि एनएचएआई के हलफनामे में नवंबर 2026 तक स्टोन क्रशर को हटाने के पुराने वादे पर कोई स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है। इसके अलावा डिवेंचर होटल के पास जहां फोरलेन नहीं बना है, वहां के काम की समयसीमा भी स्पष्ट नहीं है।

हाईकोर्ट ने इन सभी बिंदुओं पर एनएचएआई और सरकार से ताजा प्रगति रिपोर्ट तलब की है। इस मामले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर 2026 को तय की गई है।

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