इंदौर के अंबिकापुरी एक्सटेंशन में 60 फीट रोड के पास शनिवार दोपहर जेसीबी से खुदाई के दौरान नर्मदा की पाइपलाइन टूट गई। यहां दुकान और मकान निर्माण के लिए खुदाई की जा रही थी। पाइपलाइन टूटने के बाद क्षेत्र में पानी की सप्लाई प्रभावित हो गई, जिससे रहवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
शनिवार रात करीब 10 बजे पाइपलाइन सुधारने के लिए मजदूर बुलाए गए, लेकिन रहवासियों ने काम करने से रोक दिया। उनका कहना है कि पहले भी खुदाई के दौरान पाइपलाइन टूट चुकी है और शिकायत के बावजूद निर्माण कार्य जारी है।
रहवासियों का आरोप है कि जिस जमीन पर निर्माण किया जा रहा है, वह बगीचे की जमीन है। यहां अवंतिका गैस की हाई प्रेशर पाइपलाइन की चेतावनी वाला बोर्ड लगा होने के बावजूद खुदाई की जा रही है। मौके पर सात फीट से अधिक गहरे गड्ढे में पानी भरा हुआ है। जलसंकट के बीच नर्मदा की पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से रहवासियों में आक्रोश है।
पहले भी दो बार टूटी पाइपलाइन, रातोंरात की गई मरम्मत
रहवासियों का कहना है कि इस स्थान पर पहले भी खुदाई के दौरान पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो चुकी है। पहली बार पाइपलाइन टूटने पर रातोंरात उसे जोड़ दिया गया था।
दूसरी बार पाइपलाइन टूटने पर गड्ढे भर दिए गए। इसके बावजूद खुदाई और निर्माण कार्य जारी रहा। रहवासियों का आरोप है कि क्षेत्र में लगातार निर्माण गतिविधियां चल रही हैं और वाहनों की आवाजाही भी हो रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
सरकारी पाइपलाइन के ऊपर निर्माण का आरोप
रहवासी विलास लाखे ने बताया कि जिस जमीन पर निर्माण किया जा रहा है, वह खुली जमीन है। उनका आरोप है कि इस जमीन पर कब्जा किया गया है, जबकि निर्माण करने वाले लोग इसकी रजिस्ट्री होने का दावा कर रहे हैं। यहां सरकारी पानी की पाइपलाइन भी जमीन के नीचे दबी हुई है।
जब रहवासियों ने निर्माण का विरोध किया, तो निर्माण करने वालों ने पाइपलाइन को बाहर निकालकर दूसरी जगह लगाने की बात कही और आपत्ति नहीं लेने को कहा।
लाखे ने कहा कि क्षेत्र में पहले से जलसंकट है। पाइपलाइन टूटने के कारण सुबह से पूरी पट्टी में पानी नहीं आया और लोग परेशान हैं। उनका कहना है कि यदि यह संबंधित लोगों की निजी संपत्ति होती, तो रहवासी निर्माण का विरोध नहीं करते। लेकिन जिस जमीन को वे अवैध कब्जे वाली बता रहे हैं, उस पर निर्माण का विरोध जारी रहेगा।
बगीचे की जमीन पर निर्माण का आरोप, नीचे से गुजर रही गैस और नर्मदा लाइन
रहवासी विकास जैन ने बताया कि इससे पहले भी खुदाई के दौरान नर्मदा की पाइपलाइन टूट चुकी है। उस समय भी आपत्ति जताई गई थी, लेकिन रात करीब 2 बजे पाइपलाइन जोड़ दी गई थी। जैन के मुताबिक, जिस जमीन पर निर्माण किया जा रहा है, उसे बगीचे की जमीन बताया जा रहा है। उनका कहना है कि जमीन के नीचे से सीएनजी और नर्मदा की बड़ी पाइपलाइन गुजर रही है। इसके बावजूद इनके ऊपर निर्माण कराया जा रहा है।
अवंतिका गैस की चेतावनी वाले बोर्ड को पोस्टर से ढका
खुदाई वाले स्थान पर अवंतिका गैस की हाई प्रेशर पाइपलाइन का चेतावनी बोर्ड भी लगा है। इस पर लिखा है, ‘चेतावनी, उच्च दबाव गैस पाइपलाइन, खुदाई से पूर्व या आकस्मिक परिस्थिति में संपर्क करें।’ रहवासियों का आरोप है कि इस बोर्ड को पोस्टर से ढंक दिया गया है। इसके बावजूद यहां जेसीबी से खुदाई जारी है। रहवासियों ने गैस पाइपलाइन के पास खुदाई से सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है।
पार्षद बोले-मरम्मत जारी
क्षेत्रीय पार्षद अश्विन शुक्ला ने बताया कि मामला उनकी जानकारी में है। पाइपलाइन टूटने की समस्या सामने आती रहती है, जिसे सुधारने का काम किया जाता है। फिलहाल पाइपलाइन की मरम्मत जारी है। विवादित जमीन के बारे में उन्होंने कहा कि यह किसके नाम दर्ज है, इसकी जानकारी उनके पास नहीं है। वहीं, जमीन पर मालिकाना हक जताने वाले व्यक्ति ने रहवासियों के आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज किया है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

