बोकारो में BNS की धारा 163 लागू, BSL के मुख्यद्वार के 200 मीटर के दायरे में 5 या अधिक लोगों के जुटने पर रोक
विस्थापित अप्रेंटिस संघ एवं अन्य संगठनों द्वारा Bokaro Steel Plant (BSL) के मुख्य द्वार सहित अन्य सभी द्वारों को बंद कर धरना-प्रदर्शन किया जा रहा था।
इससे संयंत्र में कर्मियों, अधिकारियों, संविदा श्रमिकों एवं आवश्यक सेवाओं के आवागमन में बाधा उत्पन्न हुई तथा औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित हुई, जिससे विधि-व्यवस्था की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई थी।
आंदोलन के मद्देनजर विधि-व्यवस्था एवं औद्योगिक शांति बनाए रखने के उद्देश्य से एसडीओ, चास प्रांजल ढांडा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 (1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बोकारो इस्पात संयंत्र के मुख्य द्वार के 200 मीटर के दायरे में निषेधाज्ञा लागू कर दी है।
यह आदेश दिनांक 18 अक्टूबर की सुबह पांच बजे से अगले आदेश तक के लिए प्रभावी रहेगा। निषेधाज्ञा के अनुसार, बोकारो इस्पात संयंत्र के मुख्य द्वार के 200 मीटर के दायरे में पांच अथवा पांच से अधिक व्यक्तियों के एक साथ एकत्रित होने, भ्रमण करने तथा भीड़ लगाने पर पूर्णतः रोक लगा दी गई है।
इसके अतिरिक्त, किसी भी व्यक्ति द्वारा आग्नेयास्त्र अथवा लाठी, डंडा, भाला, गड़ासा, तलवार, तीर-धनुष जैसे पारंपरिक हथियार एवं कुदाल, गैता जैसे कोई भी खुदाई के उपकरण ले जाने, भ्रमण करने या प्रदर्शन करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
प्रतिबंधित क्षेत्र के अंतर्गत किसी भी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र के साथ जुलूस, रैली, सभा, धरना एवं प्रदर्शन का आयोजन भी पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। 200 मीटर के दायरे में ऐसी कोई भी गतिविधि जिससे औद्योगिक कार्य या सार्वजनिक आवागमन प्रभावित होने की संभावना हो, उस पर रोक रहेगी।
प्रतिनियुक्त दंडाधिकारियों एवं पुलिस पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे इस निषेधाज्ञा का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करेंगे तथा बीएसएल के मुख्य द्वार पर आवागमन सामान्य बनाए रखने के लिए आवश्यक विधिसम्मत कार्रवाई करेंगे।
प्रतिनियुक्त दंडाधिकारियों, पुलिस पदाधिकारियों एवं पुलिस बलों को छोड़कर किसी भी व्यक्ति के अवांछित प्रवेश अथवा भ्रमण पर पूर्णतः रोक लगाई गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि टूटैंक के समीप शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित तरीके से विरोध-प्रदर्शन किए जाने पर प्रशासन को कोई आपत्ति नहीं है।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगों को रखना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है तथा प्रशासन इस भावना का पूरा सम्मान करता है। बोकारो इस्पात संयंत्र के सभी द्वारों को जाम कर आवागमन बाधित किए जाने से विधि-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हुई तथा संयंत्र की सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुईं।
आवश्यक सेवाओं एवं आवागमन की निरंतरता तथा औद्योगिक शांति बनाए रखना जनहित में अत्यंत आवश्यक है।
संबंधित पक्षों एवं संगठनों से अपील की गई है कि वे संयंत्र के किसी भी द्वार को अवरुद्ध न करें तथा आवागमन को निर्बाध बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें। विरोध-प्रदर्शन को टूटैंक के समीप शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित तरीके से जारी रखा जा सकता है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

