शहर की ऐतिहासिक आमटी झील को पर्यटन स्थल बनाने का सपना करीब एक वर्ष बाद भी सरकारी फाइलों से बाहर नहीं निकल सका है। लगभग पांच करोड़ रुपये की प्रस्तावित परियोजना में झील को चंडीगढ़ की सुखना लेक की तर्ज पर विकसित कर बोटिंग, रंगीन लाइटें, वाकिंग पाथ, पार्क और रिफ्रेशमेंट जोन बनाने की योजना है।
नगर परिषद ने आर्किटेक्ट फर्म से झील एवं आसपास के पार्क का डिजाइन तैयार करवाकर प्रस्ताव शहरी स्थानीय निकाय मुख्यालय भेजा था। मुख्यालय से कई आपत्तियां लगने के बाद परिषद ने डिजाइन और अनुमान में जरूरी संशोधन कर फाइल दोबारा भेज दी। इसके बाद कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन परियोजना को
अंतिम स्वीकृति नहीं मिली।
मंजूरी के अभाव में नगर परिषद निविदा प्रक्रिया शुरू नहीं कर पा रही है। स्वीकृति मिलने के बाद एजेंसी का चयन कर निर्माण शुरू किया जाएगा। शहरवासियों का कहना है कि बड़ी परियोजना को मंजूरी मिलने तक झील की नियमित सफाई, प्रकाश और सुरक्षा के बुनियादी प्रबंध तो किए जाने चाहिए। समय रहते देखभाल नहीं हुई तो सुंदरीकरण शुरू होने से पहले झील का मौजूदा स्वरूप और अधिक खराब हो जाएगा
परिसर में पर्याप्त लाइटें नहीं होने के कारण परिवार शाम के समय यहां आने से बचते हैं। लोगों के अनुसार अंधेरा होने के बाद नशा करने वाले लोगों का जमावड़ा लग जाता है। नागरिकों ने नियमित सफाई, क्षतिग्रस्त ग्रिल की मरम्मत और सुरक्षा के लिए निगरानी की व्यवस्था करने की मांग की है।
दो बोट, रंगीन लाइटें और बच्चों के लिए लगेंगे झूले
प्रस्तावित परियोजना में झील में बोटिंग के लिए दो बोट रखने की योजना है। किनारों पर स्टील की ग्रिल और रंग-बिरंगी लाइटें लगाई जाएंगी। सुबह-शाम घूमने वालों के लिए वाकिंग पाथ तथा विश्राम के लिए बैठने की व्यवस्था विकसित होगी। बच्चों के लिए झूले और परिवारों के लिए पार्किंग एवं रिफ्रेशमेंट जोन भी बनाया जाएगा।
परिसर में धौलपुर पत्थर लगाने के साथ दीवारों पर आकर्षक डिजाइन तैयार किए जाएंगे। पार्क में नए पौधे लगाने और पुराने रास्तों की मरम्मत का प्रस्ताव भी शामिल है। सभी सुविधाएं विकसित होने पर झील शहर के बीच परिवारों के साथ समय बिताने का प्रमुख सार्वजनिक स्थान बन सकती है।
वर्ष 2019 में खर्च हुए थे 2.40 करोड़, फिर भी अधूरे रहे काम
स्वर्ण जयंती पार्क योजना के तहत वर्ष 2019 में आमटी झील और पार्क के सुधार पर करीब 2.40 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। उस समय प्रस्तावित सभी कार्य पूरे नहीं हो सके और कई सुविधाएं अधूरी रह गईं। देखरेख नहीं होने से पहले किए गए कार्य भी धीरे-धीरे बदहाल होते गए।
अब पांच करोड़ रुपये की नई परियोजना से झील की तस्वीर बदलने की उम्मीद है। नगर परिषद अधिकारियों के अनुसार संशोधित प्रस्ताव सरकार के पास भेजा जा चुका है। अंतिम स्वीकृति और बजट मिलने के बाद निविदा आमंत्रित की जाएगी। चयनित एजेंसी को कार्य सौंपने के बाद डिजाइन के अनुरूप झील एवं पार्क का पुनर्विकास शुरू किया जाएगा।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

