विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित ‘चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन’ में दुनिया के सामने गंभीर मुद्दों पर बेबाक राय रखी।
विदेश मंत्री ने यूएन को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि वैश्विक संकटों से निपटने में संयुक्त राष्ट्र को मजबूत नेतृत्व दिखाना चाहिए, न कि केवल मूकदर्शक बनकर बैठ रहना चाहिए।
आतंकवाद और स्टेटक्राफ्ट पर कड़ा संदेश
एस. जयशंकर ने आतंकवाद को वैश्विक शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया और आतंकवाद को देश की नीति या हुकूमत का हथियार के रूप में इस्तेमाल करने वाले देशों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने दो टूक कहा कि आतंकवाद का किसी भी रूप में इस्तेमाल स्वीकार्य नहीं है। इसे कभी भी सही नहीं ठहराया जा सकता और न ही इसके लिए कोई बहाना बनाया जा सकता है।
अपने बयान में विकासशील देशों के सामने आ रही चुनौतियों का जिक्र करते हुए एस. जयशंकर ने कहा कि आज दुनिया का यह हिस्सा ‘4F संकट’ से जूझ रहा है। इनमें फाइनेंस, फ्यूल, फूड और फर्टिलाइजर शामिल है।
विदेश मंत्री ने आगे कहा कि इन समस्याओं के समाधान में विकसित देशों की भी बराबर की हिस्सेदारी है। बाजार के विकृत और संकीर्ण तौर-तरीके आम जनता की परेशानियों को और बढ़ा रहे हैं, इसलिए इस पर गंभीर और सच्ची बातचीत की सख्त जरूरत है।
समावेशी AI पर क्या बोले जयशंकर?
जयशंकर ने बहुपक्षीय संस्थाओं में तत्काल सुधार की मांग करते हुए कहा कि दुनिया के बड़े हिस्सों को फैसले लेने की प्रक्रिया से बाहर नहीं रखा जा सकता। ‘सुधारित बहुपक्षवाद’ की मांग दिन-प्रतिदिन मजबूत हो रही है।
AI को लेकर चेतावनी भी दी
इसके अलावा तकनीक पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि AI दुनिया को पूरी तरह बदल सकता है, लेकिन इसके विकास और प्रभाव को मुट्ठी भर लोगों के हाथों में नहीं छोड़ा जा सकता। उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसे ‘मानव-केंद्रित और समावेशी’ दृष्टिकोण का समर्थन करता है जो पूरी मानवता के हित में हो।
अंत में विदेश मंत्री ने अपने संबोधन के अंत में इस बात पर जोर दिया कि प्रगति और समृद्धि एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं और दुनिया तब तक आगे नहीं बढ़ सकती जब तक मानवता का एक बड़ा हिस्सा बुनियादी जरूरतों से वंचित है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

