माडा में ‘कारखास’ की चर्चा से गरमाया माहौल: रात के अंधेरे में कथित तस्करी, कबाड़ से रेत तक ‘सेटिंग’ की चर्चा?

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सिंगरौली। माडा थाना क्षेत्र में इन दिनों कथित अवैध कारोबार को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। पशु तस्करी से लेकर कबाड़, अवैध शराब, गांजा और रेत के कथित कारोबार तक कई तरह के सवाल क्षेत्र में उठ रहे हैं। इन तमाम चर्चाओं के बीच आबिद और राजकुमार नामक व्यक्तियों को कथित ‘कारखास’ बताए जाने की चर्चा ने मामले को और गंभीर बना दिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार क्षेत्र में रात के अंधेरे में कथित रूप से पशुओं के परिवहन का सिलसिला जारी होने की चर्चा है। दावा किया जा रहा है कि इस कथित नेटवर्क में कुछ लोगों के बीच मध्यस्थता कराने में आबिद और राजकुमार की भूमिका होने की बात कही जा रही है।

रात होते ही सक्रिय हो जाता है कथित नेटवर्क?

सूत्रों के अनुसार माडा क्षेत्र के ग्रामीण और सुनसान रास्तों का इस्तेमाल कथित तौर पर पशुओं के परिवहन के लिए किए जाने की चर्चा है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि रात के समय लगातार वाहनों की आवाजाही हो रही है, तो पुलिस की गश्त और निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है? सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पुलिस को इन गतिविधियों की जानकारी नहीं है या फिर सूचना मिलने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है? इन सवालों का जवाब थाना पुलिस की आधिकारिक कार्रवाई से ही स्पष्ट हो सकता है।

कबाड़ गिरोह के निशाने पर सरकारी सामान?

पशु तस्करी की चर्चाओं के साथ-साथ माडा क्षेत्र में कथित कबाड़ गिरोह की सक्रियता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि क्षेत्र के अलग-अलग स्थानों से इलेक्ट्रिकल पोल और अन्य सामानों को निशाना बनाए जाने की चर्चा है। यदि सार्वजनिक अथवा विद्युत विभाग से संबंधित सामग्री वास्तव में चोरी होकर कबाड़ में जा रही है, तो यह केवल चोरी का मामला नहीं बल्कि सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। सवाल यह भी है कि ऐसे मामलों में पुलिस द्वारा अब तक कितनी शिकायतों पर कार्रवाई की गई और कितने आरोपियों तक जांच पहुंची?

गांव-गांव अवैध शराब की कथित सप्लाई

माडा थाना क्षेत्र के कई गांवों में अवैध शराब की कथित आपूर्ति को लेकर भी चर्चाएं सामने आ रही हैं। सूत्रों के अनुसार शराब की खेप कथित तौर पर अलग-अलग माध्यमों से ग्रामीण इलाकों तक पहुंचाए जाने की बात भी सामने आती रही है। अगर सूत्रों का ये दावा सही है तो सवाल सिर्फ अवैध शराब बेचने वालों पर नहीं, बल्कि उस सप्लाई नेटवर्क पर भी उठता है जिसके जरिए शराब गांवों तक पहुंचती है। स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल भी चर्चा में है कि क्या पुलिस और आबकारी विभाग को इस नेटवर्क की जानकारी नहीं है?

गांजे की बिक्री ?

क्षेत्र में कथित गांजा बिक्री की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। सूत्रों का दावा है कि कुछ स्थानों पर अवैध रूप से गांजे की बिक्री किए जाने की बात कही जा रही है। नशे के कारोबार को लेकर पुलिस की कार्रवाई आमतौर पर संवेदनशील विषय होती है। ऐसे में यदि माडा क्षेत्र में इस प्रकार की गतिविधियां चलने की सूचना है, तो पुलिस द्वारा मुखबिर तंत्र सक्रिय कर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही। यह सवाल स्थानीय स्तर पर उठ रहा है।

रेत का खेल?

माडा क्षेत्र में कथित अवैध रेत उत्खनन और परिवहन को लेकर भी सवाल कम नहीं हैं। सूत्रों के अनुसार कुछ स्थानों पर रेत के अवैध उत्खनन और ट्रैक्टरों से परिवहन की गतिविधियां चलने की चर्चा है। रेत के अवैध कारोबार में पुलिस की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे में क्षेत्र में लगातार कथित गतिविधियों की चर्चा के बावजूद ठोस कार्रवाई कितनी हुई, यह सार्वजनिक किए जाने की जरूरत है।

‘आबिद और राजकुमार’ के नाम की चर्चा?

इन तमाम चर्चाओं के बीच आबिद और राजकुमार नामक व्यक्तियों को कथित तौर पर थाना का ‘कारखास’ बताए जाने की चर्चा ने कई सवालों को जन्म दिया है। सूत्रों का दावा है कि उक्त दोनों व्यक्ति कथित रूप से क्षेत्र में चलने वाली विभिन्न गतिविधियों की जानकारी रखते हैं और थाना स्तर पर होने वाली कथित ‘सेटिंग’ में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की चर्चा है। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये बातें सूत्रों के दावे और स्थानीय चर्चाओं पर आधारित हैं।

साहब की चुप्पी?

माडा थाना क्षेत्र में इतने अलग-अलग प्रकार के कथित अवैध कारोबार की चर्चाएं होने के बावजूद पुलिस की ओर से कोई स्पष्ट सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आने पर भी सवाल उठ रहे हैं।

  • क्या थाना पुलिस को इन गतिविधियों की जानकारी है?
  • क्या इन मामलों में कोई कार्रवाई हुई है।

एसपी स्तर से जांच की जरूरत

मामला यदि केवल स्थानीय चर्चाओं तक सीमित नहीं है और वास्तव में पशु तस्करी, अवैध शराब, गांजा, कबाड़ तथा रेत के कारोबार से जुड़े नेटवर्क सक्रिय हैं, तो इसकी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है। विशेष रूप से आबिद और राजकुमार की कथित भूमिका की भी जांच होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उनके नाम पर चल रही चर्चाओं में कितनी सच्चाई है?

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