चुनाव आयोग ने बॉम्बे हाई कोर्ट में गोवा में ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) के दौरान एक ही परिवार के छह वोटरों के नाम हटाने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई टालने की मांग की थी, लेकिन हाई कोर्ट ने मंगलवार को इस अपील को खारिज कर दिया।
EC के वकील की दलील सुनने के बाद जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस और जस्टिस अमित जामसांडेकर की दो जजों वाली बेंच ने कहा, ‘परेश सालगांवकर की याचिका SIR की वैधता को चुनौती नहीं देती है और सुप्रीम कोर्ट का आदेश इस याचिका पर सुनवाई में कोई बाधा नहीं बनेगा।’
कोर्ट ने कहा, ‘हम इन सभी आदेशों को ध्यान में रख रहे हैं, लेकिन इन सभी मांगों को देखिए। उन सभी जगहों पर SIR की प्रक्रिया चल रही है। यहां ऐसा नहीं है। गोवा में प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। कोई अपील में गया था और अब अपीलीय आदेश के खिलाफ हमारे पास आया है।’
जजों ने कहा, ‘सालगांवकर की याचिका में चुनौती अपीलीय आदेश और फॉर्म 8 (पता बदलने के लिए) को खारिज करने वाले मूल आदेश को दी गई है। प्रथम दृष्टया, हमें लगता है कि यह याचिका इनमें से किसी भी आदेश के दायरे में नहीं आती है। हम इसे बहुत स्पष्ट कर रहे हैं।’
बेंच ने आगे कहा, ‘गोवा में SIR प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इन सभी (अन्य) मामलों में, अगर आप प्रक्रिया देखें, तो SIR चल रहा है। और ये मामले ज्यादा जनहित से जुड़े हैं। इन्हें किसी ऐसे विशिष्ट वोटर ने दायर नहीं किया है जिसका नाम छूट गया हो।’
चुनाव आयोग ने आगे कहा कि सीनियर एडवोकेट आशुतोष कुंभकोणी कुछ दिनों तक उपलब्ध नहीं हैं, जो आगे की बात रखेंगे। इसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई अगले मंगलवार तक के लिए टाल दी।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

