प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कई कॉर्पोरेट घरानों से जुड़े कई बड़े रिश्वत रैकेट का पर्दाफाश किया है। ये घराने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड की हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल थे।
CSR सिस्टम का इस्तेमाल हिसाब-किताब वाले फंड को बिना हिसाब-किताब वाले कैश में बदलने के जरिए के तौर पर किया जाता है। ED ने शुरुआती जांच में अनुमान लगाया कि इस सिस्टम के जरिए 200 करोड़ रुपये का फंड इधर-उधर किया गया।
कैसे फर्जी डॉक्टर चला रहा था रैकेट?
ED के मुताबिक, धर्मेंद्र कुमार चंद्रदेव नाम का एक व्यक्ति करीब तीन दशकों से डॉक्टर बनकर लोगों को धोखा दे रहा था। ये फर्जी डॉक्टर टैक्स-फ्री चैरिटी के नाम पर मनी लॉन्ड्रिंग के लिए बनाए गए अपने कई ट्रस्टों में CSR डोनेशन लिया करता था।
अपना कमीशन रखने के बाद, यह फंड कैश के रूप में डोनेट करने वाले को वापस कर दिया जाता था। इस रैकेट में कुछ कॉर्पोरेट घराने, अस्पताल, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां और सरकारी बैंक शामिल थे। CSR फंड जारी करने के लिए इन PSU के बड़े अधिकारियों को भारी रिश्वत दी जाती थी।
PSU कर्मचारी वे लोग होते हैं जो पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स में काम करते हैं। ये सरकारी स्वामित्व वाले उद्यम होते हैं, जिनमें सरकार की हिस्सेदारी 50% से 100% तक होती है।
1 अक्टूबर को, केंद्रीय एजेंसी ने इन फर्जी डोनेशन मामलों से जुड़ी महाराष्ट्र, बंगाल, गुजरात और दिल्ली-NCR की आठ जगहों पर तलाशी ली।
एजेंसी ने PSU अधिकारियों और कॉर्पोरेट अस्पतालों से जुड़े कई सबूत और ट्रांजैक्शन की जानकारी जब्त की। साथ ही 21 लाख रुपये का बिना हिसाब-किताब वाला कैश भी बरामद किया।
तलाशी में एजेंटों और बिचौलियों के एक नेटवर्क का भी पता चला है, जो CSR फंड को ट्रस्टों तक पहुंचाते थे। इसके बाद फंड को मार्केट ऑपरेटरों द्वारा नियंत्रित शेल कंपनियों (फर्जी कंपनियों) के जरिए घुमाया जाता था। इनमें से ज्यादातर कंपनियों को कई GST धोखाधड़ी की जांचों में भी संदिग्ध माना गया है।
ED ने जांच के बाद बताया, ‘देश भर में कम से कम 40 PSU और पब्लिक सेक्टर बैंकों ने आरोपियों द्वारा चलाए जा रहे ट्रस्टों को CSR डोनेशन दिया है।’
ईडी ने आगे कहा, ‘कई प्रोजेक्ट्स या तो अधूरे रहे या उन्हें मिले फंड के अनुपात में पूरा नहीं किया गया, जबकि वेंडर के बिल बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए और अतिरिक्त फंड को फर्जी या शेल कंपनियों के जरिए इधर-उधर किया गया। आरोप है कि CSR फंडिंग में मदद करने वाले बिचौलियों को किकबैक और कमीशन दिया गया।’

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

