Pitru Paksha: गयासुर के सिर पर क्यों किया जाता है पिंडदान? दशमी पर गयाजी में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

1201 Shares

पितृपक्ष के दौरान बिहार के गया में पिंडदान और तर्पण के लिए देशभर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। पितृपक्ष के 10वें दिन यानी दशमी तिथि पर गयासिर और गयाकूप वेदियों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पिंडदान किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गयाजी में पिंडदान का विशेष महत्व है और गयासिर वेदी पर पिंडदान को पितरों की मुक्ति से जोड़कर देखा जाता है।

गयासुर के सिर पर क्यों होता है पिंडदान?

गयाजी की धार्मिक परंपरा का संबंध गयासुर की कथा से जोड़ा जाता है। मान्यता के अनुसार, गयासुर एक महान तपस्वी थे। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया। धार्मिक कथा के अनुसार, बाद में भगवान विष्णु ने गयासुर के शरीर को पवित्र तीर्थ के रूप में स्थापित किया और उनके सिर वाले स्थान को गया का प्रमुख पिंडदान स्थल माना गया।

इसी धार्मिक मान्यता के कारण गया में स्थित गयासिर वेदी पर पिंडदान को विशेष महत्व दिया जाता है। श्रद्धालु यहां अपने पूर्वजों के निमित्त कर्मकांड करते हैं और उनकी शांति व मुक्ति की कामना करते हैं।

दशमी तिथि पर गयासिर और गयाकूप में उमड़ी भीड़

पितृपक्ष की दशमी तिथि पर विष्णुपद मंदिर के दक्षिणी क्षेत्र में स्थित गयासिर और गयाकूप वेदियों पर श्रद्धालुओं की भीड़ रही। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, इस दिन बड़ी संख्या में पिंडदानियों ने निर्धारित वेदियों पर श्राद्ध कर्म किया। गयासिर वेदी का परिसर अपेक्षाकृत छोटा होने के कारण आसपास के स्थानों पर भी श्रद्धालुओं ने कर्मकांड किया।

गयाकूप वेदी पर भी पिंडदान करने के लिए श्रद्धालु पहुंचे। इसके बाद कई लोगों ने संकटा देवी के दर्शन और पूजा भी की।

पिंडदान को मोक्ष से जोड़कर देखा जाता है

हिंदू धार्मिक मान्यताओं में पितृपक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करने का समय माना जाता है। बिहार पर्यटन विभाग के अनुसार, गया में फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर, अक्षयवट और अन्य वेदियों पर पिंडदान और तर्पण की परंपरा है।

धार्मिक विश्वास है कि गयाजी में पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के चलते पितृपक्ष के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग गया पहुंचते हैं।

इस साल कब तक चलेगा पितृपक्ष मेला?

वर्ष 2026 में गयाजी का पितृपक्ष मेला 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक आयोजित किया जा रहा है। अष्टमी और नवमी तिथि एक ही दिन पड़ने के कारण सामान्य श्राद्ध करने वाले श्रद्धालुओं के लिए इस बार मेला 16 दिनों का है। वहीं, त्रैपाक्षिक श्राद्ध करने वाले श्रद्धालु 11 अक्टूबर तक अपना कर्मकांड पूरा करेंगे।

गया में श्रद्धालुओं की संख्या इस बार भी काफी अधिक रही है। रिपोर्ट के अनुसार, पितृपक्ष मेले के नौवें दिन तक 32.94 लाख से अधिक श्रद्धालुओं की आवाजाही दर्ज की जा चुकी थी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *