हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में रेत और बजरी से जुड़ी लीज प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में कदम उठाया गया है। नई व्यवस्था के तहत संबंधित मामलों की जांच और अनुमति प्रक्रिया में एसडीएम की अध्यक्षता वाली संयुक्त निरीक्षण समिति की अहम भूमिका होगी।
राज्य में रेत, पत्थर और बजरी जैसे लघु खनिजों के लिए खनन लीज और अन्य खनिज रियायतों की व्यवस्था हिमाचल प्रदेश माइनर मिनरल्स नियमों के तहत संचालित होती है। खनन लीज के आवेदन की जांच के बाद मामला संयुक्त निरीक्षण समिति के पास भेजा जाता है, जिसकी अध्यक्षता संबंधित एसडीएम करते हैं।
समिति करेगी स्थल का निरीक्षण
नियमों के मुताबिक संयुक्त निरीक्षण समिति खनन स्थल का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट और सिफारिश राज्य भूविज्ञानी को भेजती है। इसके बाद आवश्यक औपचारिकताओं और संबंधित मंजूरियों के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
जनजातीय या अनुसूचित क्षेत्रों में खनन लीज से जुड़े मामलों में ग्राम सभा की पूर्व अनुशंसा का प्रावधान भी है। ऐसे क्षेत्रों में खनन लीज या स्टोन क्रशर की अनुमति के लिए संबंधित ग्राम सभा की भूमिका निर्धारित है।
रेत-बजरी की उपलब्धता और जरूरत पर जोर
हिमाचल की खनिज नीति में नदी और नालों में जमा रेत-बजरी के उपयोग तथा खनन प्रक्रिया को व्यवस्थित करने पर जोर दिया गया है। निजी कृषि भूमि और घास के मैदानों में अत्यधिक जमा रेत-बजरी को हटाने के लिए भी संयुक्त निरीक्षण समिति की सिफारिश के आधार पर अनुमति देने का प्रावधान नीति में दर्ज है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य खनिज संसाधनों के नियंत्रित उपयोग के साथ स्थानीय जरूरतों को पूरा करना और खनन गतिविधियों को निर्धारित नियमों के दायरे में रखना है। हालांकि, लीज या खनन की अनुमति संबंधित पर्यावरणीय, राजस्व और अन्य वैधानिक शर्तों की पूर्ति के अधीन रहेगी।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

