गोरखपुर में बीच हाईवे पर हुई म्यूजिक सिस्टम की चैंपियनशिप, आमजन दिखा लाचार

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बाघागाड़ा जीतपुर के पास तीन दिनों तक फोरलेन पर कर्कश आवाज में म्यूजिक सिस्टम बजता रहा, आसपास के ग्रामीण परेशान होते रहे। तेज आवाज से घरों की खिड़कियों के शीशे टूटने तक के आरोप सामने आए, लेकिन हैरानी यह है कि प्रतियोगिता स्थल के आगे और पीछे स्थित पुलिस चौकियों पर तैनात पुलिसकर्मियों और अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी।

अब सवाल यह उठ रहा है कि जब घरों तक तेज आवाज पहुंच रही थी तो पुलिस की चौकियों तक इसकी गूंज क्यों नहीं पहुंची? उधर से गुजरने वाले अधिकारियों को इस प्रतियोगिता की जानकारी क्यों नहीं हुई? एलआइयू क्या करती रही, क्या जिम्मेदारों ने जानबूझकर आंख-कान बंद कर रखे थे या फिर निगरानी की व्यवस्था ही कागजों तक सीमित थी? ये सभी सवाल उन ग्रामीणों के है जो म्यूजिक सिस्टम के बजने से परेशान थे और अब भी उनकी कान में घंटी बज रही है।

केजीएम ग्रुप जीतपुर काली मंदिर, बाघागाड़ा की ओर से आयोजित म्यूजिक सिस्टम प्रतियोगिता में आयोजकों के अनुसार करीब 20 डीजे संचालक शामिल हुए। आयोजक अनिल यादव का कह रहे हैं कि प्रशासन के निर्देशों का पालन किया गया। झारखंड, अयोध्या, बस्ती, मऊ, आजमगढ़, कुशीनगर समेत कई जिलों से संचालक पहुंचे थे। स्थानीय म्यूजिक सिस्टम वाले भी प्रतियोगिता का हिस्सा बने।

आयोजक अनिल यादव के अनुसार प्रशासन से अनुमति ली गई थी। ऐसे में सवाल यह है कि क्या ध्वनि सीमा का पालन कराने के लिए कोई अधिकारी या कर्मचारी मौके पर लगाया गया था? क्या ध्वनि स्तर की माप की गई? यदि माप हुई तो उसकी रिपोर्ट कहां है? और यदि माप नहीं हुई तो इतनी बड़ी प्रतियोगिता को बिना निगरानी के कैसे चलने दिया गया?

आयोजकों की ओर से एक-एक वाहन 27-27 साउंड बाक्स लगाए जाने की बात सामने आई है, जबकि स्थानीय लोगों का दावा है कि कुछ सिस्टम में 50 से 60 तक साउंड बाक्स लगे थे। झारखंड से आए अंकित पेटरवाल और अयोध्या के एक बड़े म्यूजिक सिस्टम में सबसे अधिक साउंड बाक्स होने की बात कही जा रही है। तीन दिनों की प्रतियोगिता में सबसे अधिक साउंड बाक्स और लाइट के आधार पर झारखंड के संचालक अंकित पेटरवाल को कमेटी ने प्रथम स्थान देकर शील्ड से सम्मानित किया।

जनजीवन पर दिखा असर

ग्रामीणों के अनुसार तेज आवाज का असर केवल सड़क या प्रतियोगिता स्थल तक सीमित नहीं रहा। रामसजीवन, राधेश्याम, नंदकुमार, जीतन निषाद, राजकुमार, नन्द, रोहित, बेचन, अशोक कन्नौजिया, अनिल और हरिगोविंद समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि तीन दिनों तक जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा। रात में सोना मुश्किल हो गया।

कानों में घंटी और सनसनाहट, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन और बेचैनी जैसी समस्या हुई। बीमार और बुजुर्ग सबसे अधिक परेशान रहे, जबकि बच्चों की नींद भी प्रभावित हुई। ग्रामीणों का यह भी दावा है कि अत्यधिक शोर से पशुओं पर भी असर पड़ा और उनका दूध कम हो गया। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में ऐसे आयोजनों में ध्वनि सीमा का कड़ाई से पालन कराया जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई हो।

वाराणसी हाईवे पर बनती रही जाम की स्थिति
पिपराइच में हादसा होने के बाद साउंड बाक्स से लदी गाड़ियों की जांच करने पुलिस जब सड़क पर उतरी तो उसे इस प्रतियोगिता का पता चला। प्रतियोगिता से निकलकर कांवड़ियों के साथ शहर में प्रवेश करने का प्रयास कर रहे दो डीजे वाहनों को पुलिस ने वापस कराया, लेकिन कोई अन्य कार्रवाई नहीं की। वहीं, प्रतियोगिता के दौरान जीतपुर में फोरलेन का एक हिस्सा लगातार बाधित रहा। इससे आम राहगीरों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। यहां बार-बार जाम की स्थिति बनती रही।

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