उत्तराखंड के छात्र संघ चुनाव में चुनावी खर्च को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि चुनाव में उम्मीदवारों के लिए निर्धारित 50 हजार रुपये की खर्च सीमा के बावजूद करीब डेढ़ करोड़ रुपये तक खर्च किए गए।
लिंगदोह समिति की सिफारिशों के तहत छात्र संघ चुनाव में उम्मीदवारों के चुनावी खर्च की सीमा तय की गई है। इसका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया में अनावश्यक धनबल को सीमित करना और विद्यार्थियों के बीच निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है।
हालांकि, उत्तराखंड में हुए छात्र संघ चुनाव को लेकर सामने आए दावों में निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक खर्च किए जाने की बात कही जा रही है। यदि ये दावे सही पाए जाते हैं, तो यह छात्र चुनावों में चुनावी खर्च के नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
मामले में अब यह महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विश्वविद्यालय और प्रशासन चुनावी खर्च से जुड़े दावों की किस तरह जांच करते हैं। साथ ही, उम्मीदवारों और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े पक्षों की ओर से इस संबंध में क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है, यह भी सामने आना बाकी है।
छात्र संघ चुनावों में लिंगदोह समिति की सिफारिशों के पालन को लेकर पहले भी चर्चा होती रही है। ऐसे में उत्तराखंड के इस मामले ने चुनावी खर्च की निगरानी और नियमों के प्रभावी अनुपालन पर फिर ध्यान केंद्रित किया है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

