धूप से चलेगी, पंखा भी चलाएगी! भागलपुर के दिव्यांग युवक ने कबाड़ से बनाई सोलर ट्राइसाइकिल; जीरो खर्च में सफर
बिहार के भागलपुर में दिव्यांग मोहम्मद रहमतुल्लाह ने सीमित संसाधनों और कबाड़ से एक अनोखी सोलर ट्राइसाइकिल तैयार की है। यह ट्राइसाइकिल सौर ऊर्जा से चलती है और इसमें चालक को गर्मी से राहत देने के लिए छोटा पंखा भी लगाया गया है। उनकी इस देसी तकनीक को देखकर भागलपुर के कचहरी चौक से गुजरने वाले लोग भी रुककर इसे देखने लगे।
कबाड़ के सामान से तैयार की ट्राइसाइकिल
सन्हौरा प्रखंड के सनोखर गांव निवासी मोहम्मद रहमतुल्लाह ने आर्थिक परेशानियों के बीच उपलब्ध कबाड़ से उपयोगी कलपुर्जे जुटाकर इस ट्राइसाइकिल को तैयार किया। इसका उद्देश्य ऐसी सवारी तैयार करना था, जिसके लिए बार-बार बिजली से बैटरी चार्ज करने या ईंधन पर खर्च करने की जरूरत न पड़े।
ट्राइसाइकिल की छत पर सोलर पैनल लगाए गए हैं। ये पैनल धूप से ऊर्जा लेकर बैटरी को चार्ज करने में मदद करते हैं। साथ ही पैनल के ऊपर बनाई गई संरचना चालक को धूप से बचाने के लिए छत का काम भी करती है।
धूप से चलेगी और पंखा भी चलाएगी
इस देसी सोलर ट्राइसाइकिल की एक खासियत इसमें लगाया गया छोटा पंखा है। सौर ऊर्जा से चलने वाला यह पंखा गर्म मौसम में चालक को राहत देने के लिए लगाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, ट्राइसाइकिल में करीब 100 वॉट का सोलर पैनल लगाया गया है, जो धूप में बैटरी को चार्ज करता है।
रहमतुल्लाह के मुताबिक, सोलर पैनल और रिचार्जेबल बैटरी की मदद से वाहन के संचालन में ईंधन या नियमित बिजली चार्जिंग का खर्च काफी कम हो जाता है। हालांकि, वास्तविक रनिंग कॉस्ट मौसम, धूप और वाहन के इस्तेमाल जैसी परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
लोगों के बीच बना आकर्षण का केंद्र
भागलपुर के कचहरी चौक से जब यह ट्राइसाइकिल गुजरी तो राहगीरों और वाहन चालकों की नजर इस पर टिक गई। सोलर पैनल वाली इस अनोखी गाड़ी को देखकर कई लोग रुककर इसे देखने लगे और इसके निर्माता के प्रयास की सराहना की।
रहमतुल्लाह का यह प्रयोग सीमित संसाधनों में स्थानीय स्तर पर किए गए नवाचार का उदाहरण है। यदि ऐसे प्रोटोटाइप को तकनीकी विशेषज्ञता और आवश्यक सहयोग मिले, तो इसकी संरचना और उपयोगिता को आगे बेहतर किया जा सकता है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

