J&K विधानसभा से स्टेटहुड बहाली का प्रस्ताव पास, अब केंद्र के फैसले पर नजर

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जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने सोमवार, 28 सितंबर 2026 को केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा जल्द बहाल करने की मांग वाला प्रस्ताव पारित कर दिया। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की ओर से पेश किए गए इस प्रस्ताव को सदन ने वॉयस वोट से मंजूरी दी। प्रस्ताव को आगे केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा।

बीजेपी विधायकों ने किया वॉकआउट

प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान बीजेपी विधायकों ने इसका विरोध किया और सदन में नारेबाजी की। वोटिंग से पहले बीजेपी विधायक सदन से बाहर चले गए। इसके बाद प्रस्ताव वॉयस वोट से पारित हो गया।

विपक्ष की ओर से प्रस्ताव की भाषा और उसमें पुराने प्रस्तावों के संदर्भों को लेकर आपत्ति जताई गई। वहीं, प्रस्ताव के समर्थक दलों ने जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग का समर्थन किया।

प्रस्ताव में क्या कहा गया?

प्रस्ताव में केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल और जल्द बहाल करने का आग्रह किया गया है। इसमें 2000 और नवंबर 2024 में विधानसभा द्वारा पारित पहले के प्रस्तावों का भी संदर्भ दिया गया है। हालांकि मौजूदा प्रस्ताव का मुख्य विषय राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग है।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में कहा कि 2024 में विधानसभा चुनाव के बाद राज्य का दर्जा बहाल किए जाने की उम्मीद थी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के दिसंबर 2023 के फैसले में राज्य का दर्जा जल्द बहाल करने संबंधी निर्देश का भी हवाला दिया।

मुख्य सचिव का पत्र क्यों आया चर्चा में?

प्रस्ताव पर चर्चा से पहले जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव अटल डुल्लू और कानून सचिव अचल सेठी की ओर से विधानसभा सचिवालय को अलग-अलग पत्र भेजे जाने की रिपोर्ट सामने आई। इनमें प्रस्ताव को सदन में लेने पर कानूनी आपत्ति जताई गई थी।

विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने इस तरह के पत्रों को लेकर आपत्ति जताई। वहीं उमर अब्दुल्ला ने भी कहा कि उन्हें इन पत्रों की जानकारी पहले नहीं थी। इस घटनाक्रम को लेकर विधानसभा और प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर बहस तेज हुई।

अब आगे क्या होगा?

विधानसभा से प्रस्ताव पारित होने के बाद इसे केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। हालांकि विधानसभा का प्रस्ताव अपने आप जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल नहीं करता। राज्य का दर्जा बहाल करने का अंतिम निर्णय केंद्र सरकार के स्तर पर होने वाली संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

जम्मू-कश्मीर अगस्त 2019 में पुनर्गठन के बाद दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित हुआ था। जम्मू-कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश में विधानसभा का प्रावधान है, जबकि लद्दाख बिना विधानसभा वाला केंद्रशासित प्रदेश है।

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