कीरतपुर-नागचला के बीच फोरलेन मार्ग पर मैहला से भवाणा के बीच प्रस्तावित चार नई सुरंगों का निर्माण वन भूमि की मंजूरी और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की आपत्तियों के कारण अधर में लटक गया है। फोरलेन को सुचारू और दुर्घटनामुक्त बनाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने मैहला, तुन्नू, टिहरा और भवाणा में पहले से बनी सुरंगों के समानांतर एक-एक और नई सुरंग बनाने की योजना तैयार की थी। हालांकि, प्रशासनिक और तकनीकी पेच फंसने से फिलहाल निर्माण कार्य पर ब्रेक लग गया है।
नए पुलों पर मंत्रालय की आपत्ति
समस्या केवल सुरंगों तक सीमित नहीं है। मंत्रालय ने इन सुरंगों को जोड़ने के लिए प्रस्तावित नए पुलों के निर्माण पर भी आपत्ति जताई है। मंत्रालय का तर्क है कि नए पुलों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ और निर्माण जटिलता बढ़ाने के बजाय एनएचएआइ को व्यावहारिक विकल्पों पर काम करना चाहिए। इसके लिए एनएचएआई को निर्देश दिए गए हैं कि वह नई सुरंगों के पोर्टल (प्रवेश व निकास द्वार) को वर्तमान में बने चार लेन पुलों से ही जोड़ने की संभावनाएं तलाशें, ताकि अतिरिक्त निर्माण से बचा जा सके।
पहले चरण में बनी पांच टनल
बिलासपुर जिले के कैंचीमोड़ से सुंदरनगर के भवाणा तक प्रथम चरण में पांच सुरंगों का निर्माण हुआ था। द्वितीय चरण में कैंचीमोड़ पर दूसरी सुरंग का निर्माण हो चुका है। मैहला से भवाणा के बीच यातायात के बढ़ते दबाव को देखते हुए दोहरी सुरंग व्यवस्था की योजना बनाई गई थी। मौजूदा सुरंगों के साथ एक-एक अतिरिक्त सुरंग बनने से फोरलेन पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह एकतरफा और सुरक्षित हो जाएगी।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

