झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की सीजीएल परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं की जांच लगातार जारी है। सीआईडी की विशेष जांच टीम (SIT) की अब तक की कार्रवाई में 36 आरोपितों को जेल भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें सफल अभ्यर्थी, एजेंट, दलाल और परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी के कर्मचारी शामिल हैं। हालांकि, अभी तक JSSC के किसी अधिकारी या कर्मचारी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
जांच एजेंसी के अनुसार, आयोग के अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। फिलहाल उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने की वजह से गिरफ्तारी नहीं हुई है। JSSC के सचिव सुधीर गुप्ता से एसआईटी कई बार पूछताछ कर चुकी है और आयोग कार्यालय से दस्तावेजों का सत्यापन भी किया गया है।
36 आरोपित जेल भेजे गए
JSSC CGL मामले में अब तक 36 आरोपितों को जेल भेजे जाने की रिपोर्ट है। इनमें परीक्षा में कथित तौर पर अनुचित लाभ लेने वाले सफल अभ्यर्थियों के अलावा एजेंट, दलाल और परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी के कर्मचारी शामिल हैं।
जांच में कथित तौर पर पेपर लीक, पैसे के लेन-देन और अभ्यर्थियों को प्रश्न-उत्तर उपलब्ध कराने जैसे आरोप सामने आए हैं। एसआईटी ने परीक्षा से जुड़े सफल अभ्यर्थियों से भी पूछताछ की है। सितंबर की एक रिपोर्ट के अनुसार, उस समय तक 1,932 सफल अभ्यर्थियों में से 350 से पूछताछ पूरी हो चुकी थी।
आयोग के अधिकारियों की भूमिका पर भी जांच
JSSC के अधिकारियों की गिरफ्तारी नहीं होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि अधिकारियों के खिलाफ अभी तक ऐसे साक्ष्य नहीं मिले हैं, जिनके आधार पर गिरफ्तारी की जा सके। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि उनकी भूमिका की जांच समाप्त हो गई है।
एसआईटी आयोग के कार्यालय से दस्तावेज जुटाकर उनका सत्यापन कर रही है। परीक्षा संचालन में शामिल एजेंसी और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
पेपर लीक और पैसों के लेन-देन की जांच
जांच में कथित तौर पर यह सामने आया है कि कुछ अभ्यर्थियों को पैसे लेकर परीक्षा में अनुचित लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई। कुछ सफल अभ्यर्थियों पर एजेंट की भूमिका निभाने के आरोप भी सामने आए हैं।
एसआईटी परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी ICN के कर्मचारियों और उसके संचालक से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही है। एजेंसी के संचालक मिथिलेश सिंह की गिरफ्तारी के प्रयास जारी बताए गए हैं।
JPSC मामले में पूर्व चेयरमैन गिरफ्तार
दूसरी ओर, झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा से जुड़े कथित अनियमितता मामले में कार्रवाई आयोग के शीर्ष स्तर तक पहुंच चुकी है। सीआईडी ने अगस्त 2026 में JPSC के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते को गिरफ्तार किया था। उन्होंने इससे पहले 22 जुलाई को पद से इस्तीफा दिया था और कहा था कि इससे जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ सकेगी।
JPSC मामले की जांच में परीक्षा संचालन से जुड़ी निजी एजेंसी, कथित वित्तीय लेन-देन और परीक्षा प्रक्रिया में संभावित अनियमितताओं की भी पड़ताल की जा रही है। जांच में सामने आए आरोपों की पुष्टि प्रक्रिया के तहत की जा रही है।
JSSC और JPSC जांच में अंतर क्यों चर्चा में?
JSSC मामले में फिलहाल गिरफ्तारियां मुख्य रूप से अभ्यर्थियों, एजेंटों, दलालों और परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी के कर्मचारियों तक सीमित हैं, जबकि आयोग के अधिकारियों की भूमिका की जांच जारी है। इसके विपरीत JPSC मामले में पूर्व चेयरमैन की गिरफ्तारी हो चुकी है।
दोनों मामलों में जांच एजेंसियां परीक्षा प्रक्रिया, निजी एजेंसियों की भूमिका, दस्तावेजों और कथित वित्तीय लेन-देन समेत अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रही हैं। अंतिम जिम्मेदारी और दोष का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

