शादी आमतौर पर दो जीवित लोगों के बीच होने वाला कानूनी रिश्ता है, लेकिन दुनिया के कुछ हिस्सों में ऐसी व्यवस्थाएं भी रही हैं, जहां किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद भी उससे विवाह को कानूनी या पारंपरिक मान्यता दी जा सकती है। इसे आम तौर पर पोस्टह्यूमस मैरिज (Posthumous Marriage) कहा जाता है।
हालांकि, यह सामान्य विवाह जैसा नहीं होता और अलग-अलग देशों में इसके नियम और कानूनी प्रभाव काफी अलग हैं।
फ्रांस में कानूनी तौर पर संभव है पोस्टह्यूमस मैरिज
फ्रांस में पोस्टह्यूमस मैरिज का स्पष्ट कानूनी प्रावधान है। फ्रांसीसी सिविल कोड के आर्टिकल 171 के तहत राष्ट्रपति गंभीर कारणों के आधार पर ऐसे विवाह की अनुमति दे सकते हैं, जिसमें विवाह के भावी साथी की मृत्यु हो चुकी हो।
इसके लिए यह साबित करना जरूरी है कि मृत व्यक्ति की शादी करने की सहमति स्पष्ट रूप से मौजूद थी। राष्ट्रपति की अनुमति के बिना ऐसी शादी नहीं हो सकती।
शादी का असर कब से माना जाता है?
फ्रांस के कानून के मुताबिक, अगर पोस्टह्यूमस मैरिज की अनुमति मिलती है तो इसके कानूनी प्रभाव मृत्यु से एक दिन पहले की तारीख से माने जाते हैं। हालांकि, इस विवाह से जीवित साथी को सामान्य उत्तराधिकार का अधिकार नहीं मिलता और पति-पत्नी के बीच सामान्य वैवाहिक संपत्ति व्यवस्था भी लागू नहीं मानी जाती।
हर अनुरोध को नहीं मिलती मंजूरी
फ्रांस में पोस्टह्यूमस मैरिज कोई सामान्य विकल्प नहीं है। इसके लिए गंभीर परिस्थितियां और मृत व्यक्ति की स्पष्ट सहमति से जुड़े पर्याप्त प्रमाण जरूरी होते हैं। फ्रांस के न्याय मंत्रालय के अनुसार, ऐसे विवाह की अनुमति केवल असाधारण परिस्थितियों में राष्ट्रपति के डिक्री से दी जा सकती है।
चीन में अलग है परंपरा
चीन में ‘मिंगहुन’ या स्पिरिट मैरिज नाम की एक पुरानी परंपरा का उल्लेख मिलता है। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भों में इसे मृत व्यक्ति और दूसरे मृत व्यक्ति या कभी-कभी जीवित व्यक्ति के बीच प्रतीकात्मक विवाह से जोड़ा गया है।
हालांकि, इसे आधुनिक फ्रांस जैसी राज्य-मान्य कानूनी शादी समझना सही नहीं होगा। यह मुख्य रूप से एक पारंपरिक/सांस्कृतिक प्रथा के रूप में जानी जाती है।
भारत में भी कुछ समुदायों में परंपरा का उल्लेख
भारत में भी कुछ समुदायों के बीच मृत व्यक्ति से जुड़े विवाह की पारंपरिक प्रथाओं का उल्लेख मिलता है। हालांकि, ऐसी सामुदायिक परंपराओं को भारत में फ्रांस जैसी सामान्य वैधानिक पोस्टह्यूमस मैरिज व्यवस्था के रूप में नहीं समझना चाहिए।
ऐतिहासिक स्रोतों में बिलावा, बडगा, कोमाटी और टोडा जैसे कुछ समुदायों के संदर्भ मिलते हैं।
आखिर क्यों बनाए गए ऐसे नियम?
पोस्टह्यूमस मैरिज की अलग-अलग परंपराओं और कानूनी व्यवस्थाओं के पीछे कारण भी अलग रहे हैं। फ्रांस में इसका इस्तेमाल असाधारण परिस्थितियों में मृत व्यक्ति और उसके जीवित साथी के संबंध को कानूनी मान्यता देने के लिए किया जा सकता है। फ्रांसीसी कानून में इसके लिए मृत व्यक्ति की सहमति और गंभीर परिस्थितियों को प्रमुख शर्त बनाया गया है।
इसलिए यह कहना ज्यादा सही होगा कि दुनिया में कुछ जगहों पर मृत्यु के बाद विवाह की कानूनी या सांस्कृतिक व्यवस्था मौजूद रही है, लेकिन इसके नियम देश और परंपरा के अनुसार काफी अलग हैं।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

