महाराष्ट्र में सिंगल मदर्स के बच्चों के लिए बड़ा फैसला, एडमिशन से हॉस्टल और काउंसलिंग तक मिलेगा सपोर्ट

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महाराष्ट्र सरकार ने सिंगल मदर्स के बच्चों की उच्च शिक्षा को आसान बनाने के लिए विशेष सपोर्ट सिस्टम तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। प्रस्तावित ‘Support Scheme for Children of Single Mothers – 2026’ के तहत ऐसे विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान अकादमिक सहायता, काउंसलिंग, हॉस्टल एवं आवास संबंधी मदद, करियर गाइडेंस और स्किल डेवलपमेंट जैसी सुविधाएं देने की सिफारिश की गई है।

इस प्रस्ताव को उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की ओर से गठित नौ सदस्यीय समिति ने तैयार किया है। समिति ने सिंगल मदर्स के बच्चों के सामने उच्च शिक्षा के दौरान आने वाली चुनौतियों का अध्ययन करने के बाद कई सुझाव सरकार के सामने रखे हैं।

एडमिशन फॉर्म में अलग कैटेगरी का प्रस्ताव

प्रस्ताव के प्रमुख सुझावों में कॉलेज एडमिशन फॉर्म और छात्र रिकॉर्ड में ‘Child of a Single Mother’ के लिए अलग कैटेगरी शामिल करना भी है। इसका उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों की पहचान और उनसे जुड़ा जरूरी डेटा जुटाना है, ताकि उनकी जरूरत के मुताबिक सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

फिलहाल कॉलेजों में इस श्रेणी के विद्यार्थियों का अलग से रिकॉर्ड नहीं रखा जाता है। ऐसे में समिति ने एक समान रजिस्ट्रेशन सिस्टम और राज्य स्तर पर डिजिटल व्यवस्था बनाने की भी सिफारिश की है। विद्यार्थियों की जानकारी को गुमनाम रखने का सुझाव भी दिया गया है।

हॉस्टल, काउंसलिंग और करियर गाइडेंस पर जोर

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत जरूरतमंद विद्यार्थियों को हॉस्टल और आवास संबंधी सहायता, काउंसलिंग, शैक्षणिक मदद, करियर गाइडेंस और कौशल विकास से जुड़ा सहयोग देने की बात कही गई है। समिति ने ऐसे विद्यार्थियों की पहचान करने का भी सुझाव दिया है, जिन्हें पारिवारिक परिस्थितियों के कारण पढ़ाई बीच में छोड़ने का जोखिम हो सकता है।

इसके साथ ही विद्यार्थियों को पहले से उपलब्ध सरकारी और कॉलेज स्तर की योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सके, इसके लिए कॉलेज, विश्वविद्यालय और संबंधित सरकारी विभागों के बीच बेहतर समन्वय की सिफारिश की गई है।

जरूरत और पात्रता के आधार पर मिलेगा लाभ

समिति की सिफारिश के मुताबिक, प्रस्तावित योजना में केवल किसी श्रेणी में पंजीकरण करा लेने से स्वतः सभी सुविधाओं का अधिकार नहीं मिलेगा। सहायता विद्यार्थी की जरूरत और पात्रता के आधार पर दिए जाने का सुझाव है।

यह प्रस्ताव महाराष्ट्र की Educational Support, Protection and Empowerment Policy-2026 से भी जुड़ा है। समिति की रिपोर्ट पर राज्य मंत्रालय में समीक्षा बैठक भी हो चुकी है।

सरकार का क्या कहना है?

महाराष्ट्र के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल के अनुसार, सिंगल मदर्स के परिवारों से आने वाले विद्यार्थियों को वित्तीय, सामाजिक और शैक्षणिक कठिनाइयों के कारण उच्च शिक्षा से वंचित नहीं होना चाहिए। प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों को आवश्यक शैक्षणिक सहायता और सुरक्षा उपलब्ध कराना है।

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