बेहतर रोजगार और जीवन स्तर की तलाश में बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर दक्षिण भारत के राज्यों का रुख कर रहे हैं। South India Interstate Migration Survey (SIIMS) 2026 के मुताबिक, दक्षिण भारत के तीन राज्यों में काम कर रहे करीब 72% प्रवासी मजदूरों का मानना है कि पलायन के बाद उनके जीवन स्तर में सुधार हुआ है। सर्वे में शामिल 57% से अधिक श्रमिकों ने उसी राज्य में आगे भी काम जारी रखने की इच्छा जताई।
यह सर्वे कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में काम कर रहे 1,824 प्रवासी मजदूरों पर किया गया। अध्ययन में पाया गया कि ज्यादातर श्रमिक उत्तर और पूर्वी भारत के राज्यों से आए हैं। इनमें पश्चिम बंगाल, बिहार, असम, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और झारखंड के मजदूरों की बड़ी हिस्सेदारी है।
सर्वे के अनुसार, अपने गृह राज्यों में कम मजदूरी, रोजगार के सीमित अवसर, अनियमित काम, गरीबी और कर्ज प्रवास के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। दक्षिण भारत पहुंचने के बाद बेहतर रोजगार अवसर और आय की संभावना ने भी मजदूरों को वहीं काम जारी रखने के लिए प्रेरित किया है।
हालांकि, प्रवासी मजदूरों के सामने कई चुनौतियां भी बनी हुई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 86% से अधिक श्रमिकों के पास लिखित रोजगार अनुबंध नहीं है। इसके अलावा भाषा, सामाजिक जुड़ाव और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच जैसी समस्याओं का भी उन्हें सामना करना पड़ता है।
रिपोर्ट में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की पोर्टेबिलिटी, बहुभाषी हेल्पडेस्क और हेल्पलाइन, बेहतर श्रम निरीक्षण व्यवस्था तथा राज्यों के बीच समन्वय मजबूत करने की सिफारिश की गई है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

