बच्चों की परवरिश आसान काम नहीं है। हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा आत्मविश्वासी, जिम्मेदार और संवेदनशील बने। लेकिन कई बार रोजमर्रा की कुछ पेरेंटिंग आदतें बच्चों के व्यवहार को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, बच्चे की किसी एक आदत को देखकर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं है कि परवरिश खराब है। बच्चों के व्यवहार पर उम्र, वातावरण, स्कूल, दोस्तों और उनकी व्यक्तिगत परिस्थितियों का भी असर पड़ता है।
पहला संकेत है—हर छोटी बात के लिए दूसरों पर निर्भर रहना। अगर बच्चे को उम्र के हिसाब से छोटे-छोटे फैसले लेने और काम करने का मौका नहीं मिलता, तो उसमें आत्मनिर्भरता विकसित होने में समय लग सकता है। माता-पिता बच्चों की मदद जरूर करें, लेकिन उन्हें अपनी क्षमता के अनुसार काम करने का अवसर भी दें।
दूसरा संकेत है—गलती स्वीकार करने से बचना। अगर बच्चा अपनी हर गलती का जिम्मेदार किसी दूसरे को बताता है, तो उसे डांटने के बजाय यह समझाना जरूरी है कि गलती होना सामान्य है और उससे सीखना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
तीसरा संकेत है—हर बात पर तुरंत चीजों की मांग करना। बच्चों की हर इच्छा तुरंत पूरी कर देने से वे इंतजार करना और जरूरत तथा इच्छा के बीच अंतर समझना कम सीख सकते हैं। इसलिए उम्र के अनुसार सीमाएं तय करना और उन्हें कारण समझाना उपयोगी हो सकता है।
चौथा संकेत है—’ना’ सुनते ही बहुत ज्यादा नाराज होना। बच्चों को सीमाएं समझने में समय लगता है। माता-पिता को नियम स्पष्ट और लगातार रखने चाहिए, साथ ही बच्चे की भावनाओं को भी सुनना चाहिए।
पांचवां संकेत है—दूसरों की भावनाओं की अनदेखी करना। सहानुभूति सिखाने के लिए बच्चों से उनके व्यवहार के असर के बारे में बात करें। जैसे, किसी दोस्त को उनकी बात से कैसा महसूस हुआ होगा—इस तरह के सवाल बच्चे को दूसरे व्यक्ति के नजरिए को समझने में मदद कर सकते हैं।
छठा संकेत है—हर समय तुलना की जरूरत महसूस करना। बच्चों की तुलना भाई-बहन या दूसरे बच्चों से करने के बजाय उनके अपने प्रयास और प्रगति पर ध्यान देना ज्यादा सकारात्मक तरीका हो सकता है।
सातवां संकेत है—माता-पिता से अपनी परेशानी साझा न करना। अगर बच्चा अपनी समस्याएं बताने से डरता है, तो घर का ऐसा माहौल बनाना जरूरी है जहां वह बिना तुरंत डांट या सजा के डर के अपनी बात कह सके।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चे का कोई व्यवहार अपने आप में ‘कमजोर परवरिश’ का प्रमाण नहीं होता। पेरेंटिंग में गलतियां होना सामान्य है और उन्हें सुधारा जा सकता है। बच्चों के साथ स्पष्ट सीमाएं, उम्र के मुताबिक जिम्मेदारियां, नियमित बातचीत और भावनात्मक सहयोग उनकी अच्छी परवरिश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

