IARC की नई स्टडी: लो-डोज CT स्कैन से फेफड़ों के कैंसर से मौत का खतरा घटा, 17 देशों के एक्सपर्ट्स ने किया आकलन
फेफड़ों के कैंसर से जुड़ी एक अहम रिपोर्ट सामने आई है। इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर यानी IARC के नए आकलन के मुताबिक, फेफड़ों के कैंसर के ज्यादा जोखिम वाले लोगों में लो-डोज CT स्कैन यानी LDCT से स्क्रीनिंग करने पर फेफड़ों के कैंसर से होने वाली मौतों को कम किया जा सकता है। IARC का यह आकलन 24 सितंबर 2026 को प्रकाशित हुआ है।
IARC के Handbooks of Cancer Prevention Volume 21 में फेफड़ों के कैंसर की स्क्रीनिंग से जुड़े फायदे और संभावित नुकसान का व्यापक मूल्यांकन किया गया है। इस समीक्षा में अलग-अलग अध्ययनों के प्रमाणों को देखा गया और विशेषज्ञों के कार्यदल ने निष्कर्ष निकाला कि हाई-रिस्क लोगों में लो-डोज CT स्क्रीनिंग से फेफड़ों के कैंसर की मृत्यु दर कम होती है और देर से पहचाने जाने वाले कैंसर के मामलों में भी कमी आती है।
इस रिपोर्ट को New England Journal of Medicine में प्रकाशित एक विशेष रिपोर्ट में भी प्रस्तुत किया गया है। इसमें IARC के विशेषज्ञों के साथ विभिन्न देशों के शोधकर्ताओं ने योगदान दिया है।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। लो-डोज CT स्क्रीनिंग हर व्यक्ति के लिए सामान्य स्वास्थ्य जांच के तौर पर करने की सलाह नहीं है। IARC का निष्कर्ष खास तौर पर फेफड़ों के कैंसर के उच्च जोखिम वाले लोगों की स्क्रीनिंग से संबंधित है।
पहले के बड़े क्लिनिकल ट्रायल भी इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रमाण दे चुके हैं। उदाहरण के लिए, NELSON ट्रायल में हाई-रिस्क लोगों की लो-डोज CT स्क्रीनिंग के बाद 10 साल के फॉलो-अप में फेफड़ों के कैंसर से मृत्यु दर स्क्रीनिंग न कराने वाले समूह की तुलना में कम पाई गई।
अमेरिका के National Lung Screening Trial में भी हाई-रिस्क वर्तमान और पूर्व भारी धूम्रपान करने वालों में लो-डोज CT से फेफड़ों के कैंसर से होने वाली मौतों में करीब 15 से 20 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई थी। हालांकि CT स्क्रीनिंग में फॉल्स-पॉजिटिव परिणाम भी सामने आ सकते हैं, इसलिए स्क्रीनिंग के फायदे और संभावित नुकसान दोनों को ध्यान में रखना जरूरी है।
IARC ने यह भी स्पष्ट किया है कि फेफड़ों के कैंसर से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका प्राथमिक रोकथाम है, खासकर तंबाकू नियंत्रण। स्क्रीनिंग को इसके साथ एक अतिरिक्त रणनीति के रूप में देखा जाता है, जिसका उद्देश्य बीमारी को शुरुआती और ज्यादा इलाज योग्य चरण में पकड़ना है।
यानी नई रिपोर्ट का मुख्य संदेश यह है कि उच्च जोखिम वाले लोगों में सही तरीके से की गई लो-डोज CT स्क्रीनिंग फेफड़ों के कैंसर से होने वाली मौतों को कम करने में मदद कर सकती है। हालांकि किस व्यक्ति को स्क्रीनिंग करानी चाहिए, यह उम्र, धूम्रपान के इतिहास और अन्य जोखिम कारकों के आधार पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ तय करते हैं।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

