शायरी से बना था गाना, 32 साल पहले Kumar Sanu ने सुनाया ‘शराबी’ के दिल का हाल; लोगों को मुंहजबानी रटी है लाइनें

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कुमार सानू (Kumar Sanu) 90 के दशक के वह सिंगर हैं, जिनके गाने आज भी फैंस के दिलों को एक अलग सा सुकून देते हैं। उन्होंने 26 अलग-अलग भाषाओं में अबतक 22 हजार से अधिक गाने गाए हैं।

से तो कुमार सानू के लगभग सभी गाने हिट हैं, लेकिन 32 साल पहले दिग्गज सिंगर ने एक ऐसा गाना गाया था, जो एक शराबी पिता के दिल के हाल को बखूबी बयां करता है। खास बात यह है कि ये अमरगीत एक शायरी से बना था, लेकिन इसे बनाते वक्त महेश भट्ट से बहुत बड़ी भूल हो गई थी।

32 साल बाद भी लोगों को एक-एक लाइन याद है

कुमार सानू (Kumar Sanu Songs) के जिस गाने का जिक्र हम अपने इस लेख में कर रहे हैं, वह साल 1995 में रिलीज हुई अजय देवगन (Ajay Devgn) स्टारर फिल्म नाजायज का है। गाने के लिरिक्स हैं, ‘बरसात के मौसम में, तन्हाई के आलम में मैं घर से निकल आया, बोतल भी उठा लाया। अभी जिंदा हूं तो जी लेने दो, भरी बरसात में पी लेने दो।’ इस गाने को कुमार सानू के साथ मिलकर रुप कुमार राठौर ने गाया था।

गाने में मकरंद देशपांडे और नसीरुद्दीन शाह को फीचर किया गया था। वैसे तो यह गाना एक पिता और नाजायज बेटे के रिश्ते पर बेस्ड है, लेकिन ऐसा कहा जाता है कि नसीरुद्दीन शाह ने गाने में शराबी की एक्टिंग में इस कदर जान फूंकी थी कि सेट पर हर किसी ने यही सोचा कि एक्टर एल्कोहल पीकर आए हैं। आज भी जब यह गाना फोन या टीवी पर लोग सुनते हैं, तो कुमार सानू की सुरीली आवाज बिल्कुल ही एक अलग दुनिया में उन्हें ले जाती है।

एक शायरी से तैयार किया गया था ब्लॉकबस्टर गाना

बरसात के मौसम के गाने को बनाने के पीछे का सबसे दिलचस्प किस्सा ये है कि महेश भट्ट और अनु मलिक जब लिरिसिस्ट और मशहूर शायर सुदेश फाकीर को सिचुएशन समझाते हुए बताया कि वह चाहते हैं कि गाने में एक शराबी नशे में अपने दर्द को बयां कर रहा है, तो सुदेश फाकीर ने तुरंत अपनी शायरी वाली डायरी से यह अल्फाज निकाले और उनसे कहा, “आज पैमाने हटा दो यारो, सारा मैखाना पिला दो यारो।” उनकी शायरी की इन दो लाइनों से धीरे-धीरे उन्होंने पूरा गाना बना दिया। जब ये गाना रिलीज हुआ और लोगों ने थिएटर में सुना तो वह बिना रोए नहीं निकल पाए।

महेश भट्ट से गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान एक बड़ी गलती भी हो गई थी। दरअसल, मकरंद देशपांडे की आवाज गाने में कुमार सानू बने थे, जबकि नसीरुद्दीन शाह के लिए रूप कुमार ने गाया था। गाने की लास्ट लाइन में कुछ गड़बड़ी हो गई और मकरंद के लिपसिंक के साथ रूप कुमार की आवाज को एडिट कर दिया गया। हालांकि, जब यह कल्ट क्लासिक सॉन्ग लोगों के सामने आया तो किसी ने इस बात को नोटिस भी नहीं किया। उन्होंने बस गाने के बोल एन्जॉय किए।

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