यूक्रेन युद्ध के बीच यूरोप पर मंडराते रूसी हमले के खतरे को देखते हुए डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में नाटो (NATO) के 32 सदस्य देशों के रक्षा प्रमुखों की दो दिवसीय अहम बैठक आयोजित की जा रही है।
क्या है ‘नाटो 3.0’?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप द्वारा यूरोप पर अपनी सुरक्षा का खर्च खुद उठाने के लगातार दबाव के बाद नाटो ने अपनी रणनीतिक दिशा बदली है, जिसे नाटो 3.0 कहा जा रहा है। वर्तमान में नाटो के कुल सैन्य खर्च में अकेले अमेरिका का हिस्सा 57 प्रतिशत है।
नए ढांचे के तहत यूरोपीय देश अब अपनी सुरक्षा की ज्यादा जिम्मेदारी खुद उठाएंगे, ताकि अमेरिका हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन से मिलने वाली चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित कर सके।
हालांकि, यूरोप में नाटो का सर्वोच्च सैन्य कमांडर अमेरिकी ही रहेगा, और ब्रिटेन व फ्रांस की स्वतंत्र परमाणु शक्तियां भी पूर्ववत बनी रहेंगी।
2035 तक जीडीपी का 5 प्रतिशत रक्षा पर खर्च
नाटो देशों ने साल 2035 तक अपनी जीडीपी का 5 प्रतिशत रक्षा और सुरक्षा पर खर्च करने का लक्ष्य रखा है। इसमें से 3.5 प्रतिशत प्रत्यक्ष सैन्य जरूरतों और 1.5 प्रतिशत सुरक्षा संबंधी बुनियादी ढांचे के विकास पर लगेगा।
रक्षा बजट पूरा करने के लिए नीदरलैंड्स जैसे देशों में स्वास्थ्य और कल्याणकारी योजनाओं में कटौती का प्रस्ताव है। वहीं, अतिरिक्त टैक्स के जरिए सालाना 54 हजार करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनाई जा रही है।
यूरोपीय देशों में युद्ध स्तर पर तैयारियां
रूस से जंग की आशंका को देखते हुए यूरोपीय देशों ने जमीनी स्तर पर भी तैयारी तेज कर दी है।
जर्मनी: 1979 में ठप पड़े मेडिकल बंकरों को फिर से चालू कर रहा है।
ब्रिटेन: गोला-बारूद और विस्फोटक बनाने की 6 नई फैक्ट्रियां स्थापित करेगा तथा स्वदेशी लंबी दूरी के 7,000 हथियार खरीदेगा।
पोलैंड: 2027 से हर साल 1 लाख (कुल 5 लाख) नागरिकों को सैन्य ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा है।
लिथुआनिया व स्वीडन: लिथुआनिया 5,000 युवाओं को अनिवार्य सैन्य सेवा में बुला रहा है, जबकि स्वीडन ने नागरिकों को आपात स्थिति में 7 दिन की पूर्व तैयारी रखने का निर्देश दिया है।
अमेरिकी हथियारों पर यूरोप की निर्भरता
आंकड़ों के मुताबिक, 2016-20 के मुकाबले यूरोप में हथियारों का आयात 143% बढ़ा है। नॉर्वे और इटली अपने 93 प्रतिशत। हथियार अमेरिका से आयात करते हैं, जबकि नीदरलैंड्स (89%), ब्रिटेन (85%) और डेनमार्क (82%) भी अमेरिकी हथियारों पर बेहद निर्भर हैं।
यही वजह है कि अब यूरोप आत्मनिर्भरता और सैन्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

