चंडीगढ़: पंजाब सरकार को सेवानिवृत्त डॉक्टर डॉ. डीएस जसपाल की ग्रेच्युटी में हुई देरी पर अब ब्याज का भुगतान करना होगा। सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) की चंडीगढ़ बेंच ने सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें विलंबित ग्रेच्युटी पर ब्याज देने से इनकार किया गया था। ट्रिब्यूनल ने 10 लाख रुपये की ग्रेच्युटी पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का निर्देश दिया है।
2011 में हुए थे सेवानिवृत्त, 2023 में मिली ग्रेच्युटी
डॉ. डीएस जसपाल 31 दिसंबर 2011 को पंजाब सरकार में प्रधान सचिव के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उनके मुताबिक, सेवानिवृत्ति के समय उनके खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई लंबित नहीं थी।
बाद में परिवहन विभाग में उनके कार्यकाल से संबंधित आरोपों को लेकर 18 अप्रैल 2015 को चार्जशीट जारी की गई। केंद्र सरकार की सहमति के बाद पंजाब सरकार ने 26 अक्टूबर 2022 को इस कार्रवाई को समाप्त कर दिया। इसके बाद अकाउंटेंट जनरल, पंजाब ने 15 मार्च 2023 को उन्हें 10 लाख रुपये की ग्रेच्युटी जारी की। हालांकि, देरी की अवधि के लिए ब्याज का भुगतान नहीं किया गया।
सरकार ने विभागीय रिकवरी का दिया था हवाला
मामले की सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि सेवानिवृत्ति के समय कुछ विभागीय रिकवरी लंबित थी। इसमें रोड सेफ्टी काउंसिल और पीआरटीसी से संबंधित कार्यालय सामग्री की खरीद से जुड़े मामले का हवाला दिया गया।
हालांकि, CAT ने माना कि सेवानिवृत्ति के समय कोई विभागीय कार्रवाई लंबित नहीं थी। ट्रिब्यूनल के अनुसार, सेवानिवृत्ति के तीन साल से अधिक समय बाद चार्जशीट जारी की गई और बाद में संबंधित कार्रवाई भी समाप्त कर दी गई। ऐसे में पूरी अवधि के लिए ग्रेच्युटी रोकने को उचित नहीं माना गया।
तीन महीने में ब्याज सहित भुगतान का आदेश
CAT ने निर्देश दिया है कि डॉ. जसपाल को सेवानिवृत्ति के तीन महीने बाद से लेकर 15 मार्च 2023 तक 10 लाख रुपये की ग्रेच्युटी पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की गणना कर भुगतान किया जाए। सरकार को आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के तीन महीने के भीतर ब्याज की राशि का भुगतान करना होगा।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

