मनाली फोरलेन का काम रोकने वालों पर सख्ती, हाई कोर्ट ने पुलिस मदद के दिए निर्देश; बॉक्स सुरंग निर्माण का रास्ता साफ

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 हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर मंडी-कुल्लू के बीच ढलान सुदृढ़ीकरण व स्थिरीकरण कार्यों में आ रही बाधाओं को लेकर एक सख्त आदेश जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए जिला प्रशासन को आदेश दिया है कि वह ढलान सुदृढ़ीकरण के निर्माण कार्य को किसी भी हाल में रुकने न दें।

अदालत ने सुरक्षा और निर्बाध कार्य सुनिश्चित करने के लिए आवश्यकता अनुसार पर्याप्त पुलिस बल व सहायता प्रदान करने के भी निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह रुख भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) की याचिका पर सुनवाई करते हुए अपनाया।

खंडपीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अवसंरचना परियोजना है, जिस पर अब तक भारी धनराशि खर्च की जा चुकी है। अदालत वर्ष 2017 से इसकी निरंतर निगरानी कर रही है। इसलिए, जनहित और राष्ट्रीय महत्व की इस परियोजना के कार्य को बीच में बाधित नहीं होने दिया जा सकता।

थलौट में बॉक्स सुरंग निर्माण
मंडी के थलौट में प्रदेश की पहली बाक्स सुरंग प्रस्तावित है। भूमि अधिग्रहण के बाद टेंडर अवार्ड हो चुका है। यहां अलाइनमेंट से बाहर कुछ घरों को नुकसान पहुंचा था। एनएचएआई उसका मुआवजा भी दे चुका है, फिर भी लोग काम शुरू नहीं करने दे रहे हैं।

दयोड़ हणोगी सुरंगों से एकतरफा यातायात शुरू, 18 किमी घटेगी दूरी

सुनवाई के दौरान अदालत को अवगत कराया गया कि दयोड़ हणोगी सुरंगों को एकतरफा यातायात के लिए खोल दिया गया है, जिससे क्षेत्र में लगने वाले भीषण जाम और भूस्खलन की समस्या से लोगों को बड़ी राहत मिली है। दाहिनी तरफ की सुरंग से गाड़ियां दौड़ रही हैं। इन सुरंगों के पूरी तरह शुरू होने से मंडी से कुल्लू के बीच की दूरी 78 किलोमीटर से घटकर 60 किलोमीटर रह जाएगी, यानी सफर सीधे 18 किलोमीटर कम हो जाएगा।

33 प्रभावितों ने नहीं जमा किए बैंक खाते, एफडी में जमा होगी बची राशि

उपायुक्त मंडी की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023 की आपदा से प्रभावित कुल 48 भू-स्वामियों में से 15 लोगों को 5.27 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा बांटा जा चुका है। हालांकि, थलौट और नगरैणी गांवों के 33 प्रभावितों ने अब तक अपने बैंक विवरण और अंडरटेकिंग जमा नहीं करवाई है।

इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को सुझाव दिया कि जब तक यह लोग अपने दावे पेश नहीं करते, तब तक शेष मुआवजा राशि को उच्च ब्याज दर वाली फिक्स्ड डिपाजिट (एफडी) में सुरक्षित जमा कर दिया जाए, जिस पर हाई कोर्ट ने आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

देव श्री मार्कंडेय मंदिर और ढांचों के मुआवजे पर बनी सहमति

सुनवाई में देव श्री मार्कंडेय मंदिर के पुनर्निर्माण और प्रभावित दीवारों, आंगनों के मुआवजे का मुद्दा भी उठा। अदालत को बताया गया कि संयुक्त निरीक्षण समिति दोबारा टहुला, थलौट, नगरैणी, फागू और जलनाल गांवों का दौरा करेगी। मंदिर के लिए रिटेनिंग और ब्रेस्ट वाल का नया आकलन लोक निर्माण विभाग के माध्यम से तैयार कर फंड जारी किया जाएगा। हाई कोर्ट ने भू-स्वामियों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए याचिका दायर करने की छूट दी है और मामले की अगली सुनवाई आठ अक्टूबर 2026 तय की है।

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