कुल्लू में बड़े हादसे का इंतजार? सिर्फ 18 जिपलाइन पंजीकृत, हॉट एयर बैलून के लिए भी कोई नीति नहीं
हिमाचल प्रदेश के पर्यटन क्षेत्रों में रोमांचक गतिविधियों के नाम पर पर्यटकों की सुरक्षा से खिलवाड़ हो रहा है। कुल्लू जिले के कई पर्यटन स्थलों पर बिना अनुमति 20 से अधिक जिपलाइन चल रही हैं। पर्यटन विभाग के रिकॉर्ड में जिले की सिर्फ 18 जिपलाइन पंजीकृत हैं। ऐसे में अवैध गतिविधियां किसकी निगरानी में चल रही हैं, यह बड़ा सवाल बन गया है।
पर्यटन स्थलों पर भी बिना अनुमति के जिपलाइन संचालित होने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। पर्यटन सीजन में रोजाना सैकड़ों पर्यटक इन गतिविधियों का हिस्सा बनते हैं, लेकिन पर्यटकों की सुरक्षा के प्रबंधों की कोई ठोस व्यवस्था नहीं दिखती।वर्ष 2025 में जून में मनाली में जिपलाइन का तार टूटने से नागपुर की एक बच्ची घायल हो गई थी। इसके बाद भी अवैध संचालन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई संचालकों के पास न तो तकनीकी स्वीकृति है और न ही प्रशिक्षित स्टाफ, फिर भी कारोबार जारी है। पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
जिप लाइन के लिए एनओसी जरूरी
पर्यटन विभाग के मुताबिक कुल्लू जिले के सभी जिपलाइन नदी-नालों के किनारे पर बने हुए हैं। ऐसे में जिपलाइन संचालक को अगर पंजीकरण करवाना है तो उसके लिए वन विभाग या फिर एनएचएआइ या बीआरओ से एनओसी लेनी जरूरी है।
वन विभाग की ओर से भी ईको टूरिज्म समिति की मदद से जिपलाइन संचालकों को एनओसी दी जा रही है। एनओसी देने से पूर्व जिपलाइन खंभे की उचित ऊंचाई, उसमें प्रयोग होने वाले उपकरणों और रस्सी की गुणवत्ता की भी जांच की जाती है।
हॉट एयर बैलून पर न कोई नीति न कोई निगरानी
कुल्लू जिले के कटराईं और डोभी के आसपास हॉट एयर बैलून का संचालन हो रहा है। अभी तक हाट एयर बैलून संचालन के लिए न तो कोई स्पष्ट नीति बनी है और न ही इस पर निगरानी हो रही है। ऐसे में अगर हादसा होता है तो इसके लिए कौन जिम्मेवार होगा। वर्ष 2025 में हाट एयर बैलून की रस्सी छूटने से बड़ा हादसा टल गया था। फिर भी इसकी निगरानी के लिए कदम नहीं उठे।
जिला पर्यटन विकास अधिकारी डॉ. रोहत शर्मा ने कहा कि कुल्लू में जिपलाइन पंजीकृत हो रही हैं। मैं स्वयं मौके पर जाकर जांच कर रहा हूं। हाट एयर बैलून जिला में कोई भी पंजीकृत नहीं है। बिना नियम के इसका पंजीकरण करना मुश्किल है। इसके लिए पत्राचार किया गया है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

