स्कूल जाने की तैयारी कर रहे सात वर्षीय हिमांशु को क्या पता था कि बस की सवारी उसकी जिंदगी की आखिरी यात्रा बन जाएगी। शनिवार सुबह नईयापार बुजुर्ग गांव में स्कूल बस घर के सामने पहुंची। दादी उसे बस में बैठाने के लिए दरवाजे तक गईं, लेकिन हिमांशु बस पर चढ़ पाता, इससे पहले ही चालक ने वाहन चला दिया।
हिमांशु पुत्र हरिकेश निषाद चिलबिलवां स्थित एसडी पब्लिक स्कूल में पढ़ता था। शुक्रवार सुबह करीब 8:15 बजे स्कूल बस उसे लेने घर पहुंची। दादी हिमांशु को बस में बैठाने के लिए उसके साथ थीं। इसी दौरान चालक ने बस स्टार्ट कर आगे बढ़ा दी। हिमांशु बस में चढ़ नहीं पाया था और वाहन के पहिये की चपेट में आ गया। हिमांशु की छोटी बहन हिमांशी भी उसके साथ स्कूल जाने के लिए घर से निकली थी। वह बस पर चढ़ने से पहले ही पीछे छूट गई।
इसी दौरान चालक ने बस चला दी और हिमांशु उसकी चपेट में आ गया। हादसे के बाद परिवार में चीख-पुकार मच गई। स्वजन आनन-फानन हिमांशु को लेकर सीएचसी पिपराइच पहुंचे, लेकिन डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। हादसे की जानकारी मिलते ही ग्रामीण मौके पर जुट गए। बस छोड़कर चालक फरार हो गया।
आक्रोशित ग्रामीणों ने बस को गांव में रोक लिया और ईंट मारकर शीशा तोड़ दिया। बस में मौजूद महिला शिक्षिका को भी ग्रामीणों ने घेर लिया और बंधक बना लिया। सूचना पर पुलिस पहुंची और ग्रामीणों को समझाकर स्थिति शांत कराने का प्रयास किया।पुलिस काफी देर तक ग्रामीणों को समझाने और स्थिति नियंत्रित करने में जुटी रही। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल बस में कंडक्टर नहीं था। उनका यह भी कहना है कि हादसे के समय बस में मौजूद शिक्षिका मोबाइल पर रील देख रही थी। हालांकि इन आरोपों की पुलिस स्तर से पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस हादसे के कारणों के साथ बस के संचालन और उसमें तैनात स्टाफ की भूमिका की भी जांच कर रही है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

